जिला अस्पताल में संसाधनों की कमी से स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। सबसे अधिक परेशानी का सामना जले मरीजों को करना पड़ता है। बर्न यूनिट न होने से अक्सर गंभीर मरीजों को लखनऊ रेफर करना पड़ता है। जिला अस्पताल में समुचित उपचार न मिल पाने के कारण गंभीर मरीजों की मौत भी हो जाती है।
बताते चलें कि बर्न यूनिट में हर मरीज के लिए एक अलग केबिन होनी चाहिए। मरीज का बिस्तर जाली से पूरी तरह कवर हो जिससे मक्खी और मच्छर से पीड़ित का बचाव हो। पूरा वार्ड वातानुकूलित होना चाहिए। इसके अलावा बर्न यूनिट अलग होनी चाहिए जिससे झुलसे लोग अन्य किसी तरह के संक्रमण से प्रभावित न हो। बर्न सर्जन होना चाहिए, लेकिन जिले में इस तरह की सुविधाओं का अभाव है।
संक्रामक वार्ड के एक भाग में झुलसे मरीजों को भर्ती किया जाता है। न तो जाली है न ही विशेषज्ञ सर्जन हैं। जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक माह यहां लगभग 8 से 10 तक विभिन्न कारणों से झुलसे मरीज भर्ती आते हैं। यहां से गंभीर मरीजों को लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। दूर दराज क्षेत्रों के अलावा आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के घर वालों के लिए मरीज को लखनऊ ले जाना भी आसान नहीं होता है। ऐसे में कुछ ही लोग लखनऊ जाते हैं और कुछ यहीं इलाज कराने को मजबूर हो जाते है।
हालांकि पिछले दिनों निरीक्षण करने पहुंची डीएम किंजल सिंह ने बर्न वार्ड में एसी न देखकर नाराजगी व्यक्त की थी। सीएमओ को तत्काल एसी लगवाने के निर्देश दिए थे इसके बाद वार्ड में एसी तो लगवा दी गई लेकिन अन्य संसाधनों का अभी तक अभाव है।
भेजा गया है बर्न यूनिट के लिए प्रस्ताव
सीएमओ डा. अरुण कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल में अभी तक बर्न यूनिट नहीं है। बर्न यूनिट के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। पुराने सीएमओ कार्यालय की जगह पर पूरी नई यूनिट बनेगी। उसमें सभी व्यवस्थाएं होंगी। अभी तक जैसी भी व्यवस्था है उसी में बेहतर उपचार करने का प्रयास किया जाता है। बर्न सर्जन के लिए भी शासन से मांग की गई है। इस वर्ष के अंत तक बर्न यूनिट पर काम शुरू हो जाने की उम्मीद है।