दुधवा टाइगर रिजर्व के बफरजोन में शामिल मैलानी रेंज इंसानों के लिए खतरनाक जोन बन चुका है। बाघ के ताबड़तोड़ हमलों से जंगलों से सटे गांव में रहने वाले लोगों में नाराजगी है। बाघों के डर से जंगल किनारे बसे गांव के लोग खेतों की रखवाली भी नहीं कर पा रहे हैं। गन्ना काटते वक्त भी उन्हें इस बात का डर रहता है कि न जाने कब बाघ आकर उन पर हमला कर दे। इसके चलते फसल काटने को मजदूर भी मिलना मुश्किल हो रहा है। मैलानी रेंज बाघ के हमलों के लिए पहले से ही काफी संवेदनशील रही है। इससे पहले इसी क्षेत्र में नौ लोगों की मौत हो चुकी है। करीब दो दर्जन लोग बाघ हमलों में घायल हो चुके है। पिछले करीब डेढ़ साल से इस क्षेत्र में बाघ के हमलों से किसी की मौत न होने से ऐसा लग रहा था, कि अब बाघों के हमले थम गए हैं, लेकिन नए साल की शुरूआत में ही बाघ के हमले से रिटायर्ड रेलकर्मी की मौत से लोग फिर सिहर उठे हैं। हालांकि शाहजहांपुर जिले के थाना खुटार क्षेत्र अंतर्गत बढ़ईपुर गांव निवासी संतराम(62) पर बाघ का उस समय हुआ जब वह मैलानी-पलिया स्टेट हाईवे से सटे उत्तरी मैलानी बीट के कंपार्टमेंट 12 जंगल के अंदर से गुजर रहा था। लेकिन जंगल के बाहर खेतों में भी इंसान सुरक्षित नहीं है। इससे पहले चार जनवरी 2018 को मैलानी रेंज की खरेहटा बीट में गांव उजागरपुर के बनवारी लाल(45) जंगल से सटे खेत की रखवाली कर रहा था, इसी बीच जंगल से निकले एक बाघ ने उस पर हमला कर गंभीर घायल कर दिया था। लोग अभी इस घटना को भुला भी नहीं पाए थे कि एक सप्ताह के अंदर बाघ हमले की दूसरी घटना में रिटायर्ड रेलकर्मी की मौत से लोगों में डर पैदा हो गया है।
मैलानी रेंज में बाघ के हमले में दसवीं मौत
मैलानी रेंज के जंगल से सटे खरेहटा, कपरहाकुंआ, छेदीपुर, भरिगवां, सोहनरा भूड़, कुकरा, ढ़ाका और बिहारीपुर में बाघ-बाघिन ने डेढ़ साल पहले सात माह के अंदर ताबड़तोड़ हमले किए। इसमें बीस वर्षीय दो युवतियों किरन और सरस्वती के अलावा रईश, तरसेम सिंह, अंजनि, भोगन कश्यप, बाबूराम, टीकाराम और जानकी आदि नौ लोगों को अपना निवाला बनाया था। इसी कड़ी में डेढ़ साल बाद आठ जनवरी सोमवार को शाहजहांपुर जिले के थाना खुटार अंतर्गत बढ़ईपुर गांव निवासी संतराम(62) पर हमला कर बाघ ने हमला कर निवाला बनाने से मृतकों की संख्या बढ़कर दस हो गई।
दो हफ्ते पहले बाघ के हमले में हुई है जोगेंद्र की मौत
मैलानी। दो हफ्ते पहले किशनपुर सेंक्चुरी के घास फाटा क्षेत्र में पीलीभीत के थाना सेहरामऊ उत्तरी के गांव गढ़ा कलां निवासी जोगेंदर सिंह(32) का शव मिला था। जोगेंदर चलतुआ बाबा फार्म पर मजदूरी करता था। वह 25 दिसंबर को शाम चार बजे जंगल से सटेे खेतों में फसल देखने गया था। अगले दिन उसका अधखाया शव फाटा इलाके केे जंगल से बरामद हुआ था। घटनास्थल के पास बाघिन के पगमार्क मिले थे।
चलतुआ मार्ग के जंगल में ही हुई दूसरी घटना
मैलानी। दो हफ्ते पहले बाघिन के हमले में किशनपुर सेंक्चुरी इलाके में चलतुआ के बाबा फार्म पर काम करने वाले जोगेंदर की मौत के बाद बढ़ईपुर निवासी रिटायर्ड रेलकर्मी की मौैत भी बाघ के हमले मेें चलतुआ मार्ग के मैलानी रेंज के जंगल में हुई है। दोनों घटनास्थलों की दूरी बहुत ज्यादा नहीं है।
दहशत में हैं क्षेत्र के ग्रामीण
मैैलानी। जंगल के पार स्थित शाहजहांपुर जिले के हंसपुर के ग्रामीणों का आवागमन मैलानी के इसी जंगल से होता हैै। घटनास्थल के पास मौैजूद हंसपुर निवासी रमाकांत, तारा देवी, राम विंध्याचल, कलावती, इंद्रजीत आदि ने बताया कि ग्रामीणों के अलावा गांव के दर्जनों बच्चे मैलानी में पढ़ने के लिए इसी रास्ते से जाते हैं। अब उन्हें बाघ के हमले का खतरा बना हुआ है।
मैलानी में ट्रैकमैन थे संतराम
मैलानी। बाघ के हमले में मारे गए संतराम रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग में मैलानी में ट्रैकमैैन थे। दो साल पहले ही वह रिटायर हुए थे। वह अपनेे पीछे छह बेटियां, एक बेटा औैर विकलांग पत्नी गीता को छोड़ गए हैं। इनमें एक बेटी औैर बेटा अविवाहित है। संतराम की मौत के बाद परिवारवालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पहले ही अलर्ट कर दिया था ग्रामीणों को
मैलानी। वन क्षेत्राधिकारी मैलानी डीएस यादव ने बताया कि उत्तर मैलानी बीट के जंगल में बाघ के खतरे के बाबत आसपास के गांववालों को पहले ही अलर्ट कर दिया गया था। लेकिन अलर्ट को तवज्जो न देने से ही यह घटना घट गई। उन्होंने ग्रामीणों से जंगल में न जाने की फिर ताकीद की हैै।