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इंजीनियरिंग थी ट्रेड, पर पिता की प्रेरणा से बन गईं एंटरप्रेन्योर

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डॉक्टर अशोक पांडे बेटी स्वाति पांडे के साथ - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। विदेश की मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़कर पिता की प्रेरणा से स्टीविया की खेती कर शुगर फ्री उत्पाद बनाने वाली स्वाति पांडे ने न सिर्फ अपने पिता बल्कि जिले का नाम भी रोशन किया है। इंजीनियर बैकग्राउंड की स्वाति पांडे ने फादर्स डे पर जिंदगी के सफल बदलाव के दौर का श्रेय अपने पिता डॉक्टर अशोक कुमार पांडे को दिया।
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कई शहरों में स्टीविया की खेती कर शुगर फ्री दवा बनाने वाली कंपनी एबोरियल इनोवेशंस प्राइवेट लिमिटेड की सीईओ स्वाति पांडे ने बताया कि शहर निवासी उनके पिता डॉ अशोक कुमार पांडे मेडिसिन साइंटिस्ट हैं और सहायक महानिदेशक, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनका कहना है कि पिता की ही प्रेरणा से वह स्टीविया की खेती कर शुगर के मरीजों के लिए दवा बना रहीं हैं।
स्वाति पांडे ने बताया कि उन्होंने आईआईटी धनबाद से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने इंपीरियल कॉलेज लंदन से एमएससी में मास्टर की डिग्री ली और फिर पढ़ाई के बाद सिंगापुर में सस्टेनेबेल एनर्जी के काम से जुड़ी एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी भी की। लेकिन, उनका मन वहां नहीं रमा और उन्होंने कुछ अलग करने की ठानी, जिस पर उन्हें अपने पिता का सहयोग मिला।
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वह बताती हैं, कि घर में उनकी मां शुगर की मरीज थीं, इसके अलावा शुगर की आम होती बीमारी की वजह से उन्हें शुगर की दवा बनाने का ख्याल आया, जिस पर उन्हें अपने पिता से हौसला मिला और उनकी 25 साल से मेडिसिन साइंटिस्ट होने का लाभ उठाते हुए उन्होंने एक कंपनी बनाकर पहले स्टीविया पौधे की खेती और फिर उससे शुगर की दवा बनाने का काम शुरू किया। आज उनका काम कई शहरों में चल रहा है। फादर्स डे पर उन्होंने अपनी सफलता श्रेय अपने पिता को दिया है। वहीं, औषधीय पौधों के विभिन्न आयामों पर शोध करने वाले स्वाति के पिता डॉ. अशोक कुमार पांडे भी उनकी इस सफलता से गदगद हैं। संवाद
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