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Lakhimpur Kheri News: किसानों को मंडी में आढ़तों पर गेहूं बेचने से रोका, हंगामा

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लखीमपुर खीरी। सरकारी केंद्रों पर पसरे सन्नाटे को देखते हुए मंडी समिति ने मंडी में आने वाले किसानों की ट्रॉलियों के आढ़तों पर तौल रुकवा दी है। किसानों का आरोप है कि मंडी सचिव सरकारी केंद्र पर ही फसल बेचने का दबाव बना रहे हैं। बुधवार सुबह इसी बात को लेकर हंगामा हुआ। किसानों और आढ़तियों का कहना है कि आढ़तों पर किसानों का गेहूं तौला गया तो आढ़त का लाइसेंस निरस्त करने की धमकी दी जा रही है।
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बुधवार को मंडी पहुंचे किसानों की गेहूं भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली केंद्रों पर खड़ी करा ली गई। किसानों का आरोप था कि मंडी सचिव ने आढ़तों पर तौल न कराने की बात कहते हुए मंडी आने वाली ट्रॉलियों को सरकारी केंद्रों पर ही तुलवाने की बात कही है। साथ ही आढ़तों पर गेहूं तौलवाने पर गेट पास न देने, आढ़तियों का लाइसेंस निरस्त करने की भी धमकी दी है। हालांकि मंडी सचिव सुधांशु ने इस तरह की बात कहे जाने से इन्कार किया है।

सुंदरवल के सिसौरा गांव से करीब 40 क्विंटल गेहूं लेकर पहुंचे किसान रामबिलास ने बताया कि मंडी में तौल कराने के बाद ही कुछ लोग उन्हें क्रय केंद्र पर ले आए। वह मंडी की आढ़त पर अपनी फसल बेचने आए थे। क्योंकि उन्हें भुगतान की तत्काल आवश्यकता थी। क्रय केंद्र पर दो घंटे से ज्यादा का समय बीत चुका था लेकिन कोई पुरसाहाल नहीं था। आढ़ती तौल करने से घबरा रहे थे।
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दाउदपुर निवासी किसान कौशल किशोर का कहना था कि उनके गेहूं में नमी थी। इसको लेकर वह आढ़त पर आए थे। आढ़ती सरकारी रेट से कुछ ज्यादा मूल्य पर फसल ले लेते हैं। लेकिन यहां आने पर सरकारी केंद्र पर ही फसल तौलवाने की बात कही गई। किसान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एक अधिकारी ने आढ़तों का लाइसेंस निरस्त करने की बात कही थी, जिसके चलते तौल नहीं हो रही है।
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मिर्जापुर भाऊ के रहने वाले जसविंदर सिंह की फसल में भी 12 प्रतिशत से ज्यादा नमी थी, इसके चलते पहले तो केंद्र प्रभारी ने फसल लेने से मना कर दिया था। हालांकि मंडी सचिव के कहने के बाद किसान की नम फसल की भी तुलवाई हुई। केंद्र प्रभारी ने बताया कि नम फसल लेने से हम लोगों को इसकी भरपाई करनी होगी।
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किसान सरजीत सिंह जोकि सीतापुर जिले के लहरपुर से गेहूं की फसल लेकर आए थे। यह भी फसल आढ़त पर लेकर पहुंचे जहां पर काफी दबाव के बाद भी जब किसान नहीं माना तो अधिकारी पीछे हो गए। हालांकि करीब साढ़े 23 सौ रुपये क्विंटल की दर से उसका गेहूं खरीदा गया।
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किसान अपनी फसल को बेचने के लिए स्वतंत्र हैं। क्रय केंद्रों पर ही फसल तौलवाने के लिए बनाए जा रहे दबाव की जानकारी नहीं है। तय मूल्य से अधिक कहीं भी फसल का रेट मिले तो किसान बेच सकता है। फिलहाल मामले को अपने स्तर से दिखवाया जाएगा।
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संजय कुमार सिंह, एडीएम
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