विलोबी परिसर में धरना देते किसान। संवाद
लखीमपुर खीरी। शारदा सहायक बैराज के दोनों किनारों पर बने मार्जिनल बांधों के बीच 28 ग्राम पंचायतों के गांव और आबादी डूब क्षेत्र में आने का आरोप किसानों ने लगाया है। इसकाे लेकर डूब क्षेत्र संबंधी शासनादेश वापस लेने की मांग की।
भाकपा (माले) और अखिल भारतीय किसान महासभा के नेतृत्व में मंगलवार को किसानों ने शहीद नसीरुद्दीन मौजी (विलोबी) मैदान में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद जुलूस निकालकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री व जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
ज्ञापन में डूब क्षेत्र संबंधी शासनादेश वापस लेने, नदी कटान रोकने के लिए ठोकर बांधों का निर्माण कराने, दशकों से जमीन पर काबिज किसानों को वन अधिनियम के तहत पट्टा देने, मैलानी-नानपारा रेल संचालन दोबारा शुरू कराने और मैलानी से नानपारा तक ब्रॉडगेज रेलवे लाइन का निर्माण कराने की मांग की गई।
भाकपा (माले) की केंद्रीय कमेटी सदस्य कृष्णा अधिकारी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2010 में डूब क्षेत्र संबंधी शासनादेश बनाया गया था। वर्ष 2015 में इसे लागू किए जाने के बाद शारदा सहायक बैराज के दोनों किनारों पर बने मार्जिनल बांधों के बीच 28 ग्राम पंचायतों के गांव और आबादी डूब क्षेत्र में आ गए हैं।
किसान महासभा के लखीमपुर तहसील सचिव दयाराम मौर्य ने कहा कि सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन किसान खाद और डीजल के लिए परेशान हैं। उन्होंने कहा कि अब किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज करेंगे। सभा को राजेश, ओमप्रकाश मौर्य, तपेश्वरी, सुरेश, बैजनाथ और रामकेवल समेत अन्य लोगों ने संबोधित किया। एपवा की सहसचिव अनीता निषाद ने संचालन किया।