राजापुर मंडी में निजी आढ़तों पर रखा धान। संवाद
लखीमपुर खीरी। अगली फसल की बोआई के लिए किसानों को तुरंत नकदी चाहिए, लेकिन सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने के लिए उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में किसान निजी आढ़तों पर समर्थन मूल्य से 591 से 641 रुपये प्रति क्विंटल तक कम दाम पर धान बेचने के लिए मजबूर हैं।
कॉमन धान का समर्थन मूल्य 2441 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि खुले बाजार में 1800 से 1850 रुपये ही मिल रहे हैं। जिले में 160 क्रय केंद्र खुलने के बावजूद अब तक लक्ष्य के मुकाबले खरीद बेहद कम हुई है।
बेमौसम बारिश की मार झेलने के बाद धान की फसल तैयार हुई। किसान खेतों से उपज समेटकर अगली फसल की बोआई की तैयारी में जुटे हैं। खाद-बीज खरीदने के लिए नकदी की जरूरत है, इसलिए वे धान बेचकर जल्द पैसा जुटाना चाहते हैं। सरकारी मानकों पर धान खरा न उतरने के कारण भी कुछ किसान खुले बाजार में उपज बेच रहे हैं।
बिजुआ निवासी किसान सोबरन ने बताया कि अगली फसल की बोआई के लिए खाद और बीज खरीदने हैं। ऐसे में धान बाजार में बेचना मजबूरी है। किसान लखविंद्र ने बताया कि उन्होंने बोआई के लिए खेत तैयार कर लिए हैं। जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें निजी आढ़त पर 1800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान बेचना पड़ा।
जिले में इस बार धान खरीद का लक्ष्य दो लाख 45 सौ क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष अब तक करीब दो से ढाई हजार क्विंटल धान की खरीद हुई है। कॉमन धान का समर्थन मूल्य 2441 रुपये और ग्रेड-ए धान का 2461 रुपये प्रति क्विंटल तय है।
डिप्टी आरएमओ नमन पांडेय ने बताया कि कुछ जगह धान में नमी बरकरार है। इसलिए तय मानकों के अनुसार खरीद नहीं हो पा रही है। लक्ष्य समय पर पूरा किया जाएगा। सरकारी खरीद का भुगतान किसानों के खातों में 24 से 48 घंटे के भीतर किया जाता है।