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Lakhimpur Kheri News: तौल बंद कराकर डोंगे में कूदे किसान... मिल ने किया सात करोड़ का भुगतान

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चीनी मिल के अधिकारियों से वार्ता करते किसान नेता श्री कृष्ण वर्मा-संवाद
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गोला गोकर्णनाथ/लखीमपुर खीरी। बजाज ग्रुप की चीनी मिलों के किसानों का बकाया गन्ना भुगतान न करने पर हर दिन टकराव की स्थिति बन रही है। शुक्रवार को गोला चीनी मिल में हंगामा करते हुए किसान केन कैरियर में कूद गए और गन्ने की पेराई रुकवा दी। काफी देर बाद पहुंचे डीसीओ और मिल प्रशासन की सहमति से सात करोड़ रुपये किसानों के खाते में तुरंत भेजे गए। साथ ही 20 दिन में 62 करोड़ रुपये भुगतान पर फैसला हुआ। इस दौरान पांच घंटे तक चीनी मिल बंद रही।
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राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन के मंडल संगठन मंत्री संतोष सिंह के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने शुक्रवार सुबह आठ बजे गन्ना भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां चीनी मिल के गेट पर लगा दीं। इससे तौल बंद हो गई। गुस्साए किसान डोंगे में कूद गए, जिससे पेराई भी बंद हो गई। चीनी मिल बंद होने की सूचना पर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पटेल श्रीकृष्ण वर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष शिवदयाल वर्मा, रवींद्र वर्मा, अनिल वर्मा, रामनरेश, हरिकरन शालिकराम, रामनिवास, भरतपाल, गुरु प्रसाद, राधेश्याम सहित काफी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता चीनी मिल पहुंच गए।
चीनी मिल के अधिकारियों ने किसानों को समझाते हुए डोंगे से बाहर लाने के काफी प्रयास किए, लेकिन किसान नहीं माने। किसानों ने जिला गन्ना अधिकारी (डीसीओ) को बुलाने के लिए कहा और चेतावनी दी कि अब फैसला उन्हीं की मौजूदगी में होगा। काफी देर बाद डीसीओ वेद प्रकाश सिंह चीनी मिल पहुंचे तो वार्ता शुरू हुई। किसानों ने 14 दिन पूर्व पेरे गए गन्ने का तत्काल भुगतान मांगा मगर सहमति नहीं बन सकी।
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काफी मान-मनौव्वल के बाद सात करोड़ रुपये का तत्काल भुगतान, 20 दिन में 62 करोड़ रुपये के भुगतान और शादी-बीमारी वाले गन्ना किसानों को अतिरिक्त 50 प्रतिशत के भुगतान पर सहमति बनी। करीब पांच घंटे ठप रहने के बाद मिल की पेराई चालू की गई। लिखित सहमति पत्र पर बजाज मिल के यूनिट हेड जितेंद्र सिंह जादौन, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक आशुतोष मधुकर, सचिव बलवंत चौधरी ने हस्ताक्षर किए।
उधर, संगठन के जिला अध्यक्ष मनोज कुमार फौजी और मंडल संगठन मंत्री संतोष सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि बजाज मिल के अधिकारियों ने लिखित पत्र के अनुसार भुगतान नहीं किया, तो फिर बजाज चीनी मिल का चक्का जाम किया जाएगा।

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पिछले सत्र का पूरा भुगतान किया जा चुका है। इस सत्र का सात दिन का भुगतान किया गया है। सात करोड़ का भुगतान फौरन किया गया है, जबकि 20 दिन में 62 करोड़ रुपये के भुगतान पर लिखित समझौता हुआ है। डिफर का पैसा भी किसानों को जा चुका है। अब पेमेंट गन्ने के नए मूल्य के हिसाब से बन रहा है।
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सतीश श्रीवास्तव, पीआरओ, बजाज चीनी मिल गोला
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