सिंघिया में कृषि योग्य भूमि कटान करती शारदा नदी। स्रोत: किसान जगदीप सिंह
बिजुआ। शारदा नदी का कटान ग्राम पंचायत गुजारा के सिंघिया एहेतमाली और सिंघिया गैर एहेतमाली का अस्तित्व लगातार मिटा रहा है। पिछले वर्ष गांव उजड़ने के बाद अब किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि भी तेजी से नदी में समा रही है। गन्ना और धान की खड़ी फसलें कटान की भेंट चढ़ रही हैं। इससे प्रभावित परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है।
ग्रामीणों के अनुसार कटान लगातार बढ़ रहा है। जिन किसानों के पास कल तक खेती थी, वे आज भूमिहीन होने की कगार पर हैं। अपनी आंखों के सामने खेतों को नदी में समाते देख किसान बेबस हैं।
पिछले वर्ष शारदा नदी ने करीब 200 घरों वाले सिंघिया गांव को पूरी तरह निगल लिया था। विस्थापित परिवारों ने दूसरे गांवों में किसी तरह नया ठिकाना बनाया, लेकिन अब उनकी बची हुई खेती भी नदी में समाती जा रही है। इससे उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
ग्राम प्रशासक सतनाम सिंह ने बताया कि अब तक करीब 65 एकड़ कृषि भूमि कटान की भेंट चढ़ चुकी है। यदि समय रहते प्रभावी कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया तो सिंघिया एहेतमाली और सिंघिया गैर एहेतमाली का शेष हिस्सा भी खतरे में पड़ जाएगा। किसानों ने प्रशासन से तत्काल राहत, मुआवजा और स्थायी बचाव कार्य की मांग की है।
तहसीलदार सुनील कुमार ने बताया कि लेखपाल राकेश शुक्ला लगातार मौके पर निगरानी कर रहे हैं और नियमित रिपोर्ट भेज रहे हैं। प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है तथा आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।