सिर्फ प्लास्टिक का पाइप देकर कर रहे खानापूर्ति
बोरिंग के लिए किसानों से लिए जा रहे पैसे
लघु सिंचाई विभाग द्वारा संचालित निशुल्क बोरिंग योजना में किसानों को ठगा जा रहा है। किसानों को सिर्फ प्लास्टिक का पाइप देकर अधिकारी अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। खेत में बोरिंग के लिए बजट न होने का हवाला देकर किसानों से रुपये वसूले जाते हैं। वर्ष 2017-18 में 2055 नि:शुल्क बोरिंग कराने का दावा विभागीय अधिकारी कर रहे हैं। तो वहीं ब्लाक में बैठे जेई अपना अलग ही राग अलापते हुए बजट कम मिलने की बात कह रहे हैं।
नि:शुल्क बोरिंग कराने के लिए सामान्य वर्ग के सीमांत किसानों के लिए सात हजार और लघु किसान के लिए पांच हजार रुपये बजट निर्धारित है। जबकि अनुसूचित जाति के किसानों की बोरिंग पर 10 हजार रुपये बजट दिया जाता है। इस धनराशि से अधिकतम 30 मीटर (करीब 100 से 110 फुट) गहराई तक बोरिंग कराने के निर्देश हैं। इस वर्ष 15 ब्लाकों में 2055 बोरिंग कराने पर एक करोड़ 68 लाख रुपये बजट खर्च किया गया है। इनमें 1007 किसान अनुसूचित जाति, 66 किसान अनुसूचित जनजाति और सामान्य वर्ग के 982 किसानों को नि:शुल्क बोरिंग का लाभ दिए जाने का दावा किया जा रहा है। खास बात यह है कि जिन इलाकों में बोरिंग की सबसे ज्यादा जरूरत है, उनमें सबसे कम बोरिंग कराई गई हैं। जबकि तराई इलाके में ज्यादा बोरिंग दी गई हैं। किसान बताते हैं कि नि:शुल्क बोरिंग के नाम पर सिर्फ प्लास्टिक की पाइप ही दी गई, जबकि बोरिंग कराने के लिए रुपये वसूले गए। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि ज्यादातर किसानों को प्लास्टिक का पाइप पकड़ाकर इतिश्री कर ली गई, जिससे किसानों के खेत में अब तक बोरिंग नहीं कराई जा सकी है। वजह है कि ब्लाकों में तैनात जेई बोरिंग के लिए पैसा न मिलने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। बजट की धनराशि पाइपों पर खर्च हो जाने की बात कही जा रही है। पिछले वर्षों में भी पाइप पाए किसान अभी खेत में बोरिंग नहीं करा सके हैं।
पाइप खरीद में हो रहा खेल
इस योजना में पैसा किसानों के खाते में नहीं दिया जा रहा है, बल्कि ब्लाकों पर जेई ही पैसे का उपयोग कर रहे हैं। लिहाजा ब्लाकों में थोक के भाव पहले से ही घटिया दर्जे की पाइप खरीद कर रखी गई हैं। जबकि किसानों को खुद ही पाइप खरीदने का प्राविधान है, जिससे डीलर के यहां किसानों के नाम पर पाइप खरीद दर्शाई जा रही है। लाभार्थी किसान चाहे सामान्य, एससी, एसटी कोई भी हो, सभी पर एक ही फार्मूला लागू किया जा रहा है।
ब्लाकों में बोरिंग का लक्ष्य
लखीमपुर ब्लाक में 152, फूलबेहड़ में 190, नकहा में 145, मोहम्मदी में 93, गोला में 60, पसगवां में 96, बांकेगंज में 120, निघासन में 230, पलिया में 231, बेहजम में 38, मितौली में 34, धौरहरा में 150, ईसानगर में 150, रमियाबेहड़ में 194, बिजुआ में 172 नि:शुल्क बोरिंग दी गई हैं। इनमें बेहजम, मितौली, गोला, पसगवां और मोहम्मदी ब्लाक में जलस्तर नीचे होने के साथ ही बारिश भी कम होती है। इसलिए सबसे ज्यादा बोरिंग की जरूरत इन्हीं ब्लाकों में है, लेकिन ज्यादा गहराई में बोरिंग कराने के चलते अधिकारी इन ब्लाकों में कन्नी काट रहे हैं।
अप्रैल से जून 2017 तक बोरिंग कराने का लक्ष्य मिला था, जिसके मुताबिक बोरिंग कराई जा चुकी है। बेहजम, मितौली, मोहम्मदी और पसगवां ब्लाक में जलस्तर कम होने के चलते ज्यादा गहराई में बोरिंग करानी पड़ती है। जबकि बजट काफी कम है। इससे इन इलाकों में बोरिंग कराने के लिए किसानों से मजदूरी दिलाए जाने की सूचना मिली है। पाइप की खरीद स्वयं किसानों का करनी है। यदि कहीं गड़बड़ी की शिकायत मिलती है, तो जांच कराई जाएगी।
सीएल जायसवाल, सहायक अभियंता, लघु सिंचाई