फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lakhimpur Kheri News: कर्ज लेकर भूल गए किसान और उद्यमी, बैंकों के 1290 करोड़ फंसे

Fri, 06 Feb 2026 11:17 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
विज्ञापन
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी। बेरोजगारों को उद्यमी बनाने और किसानों को खेतीबाड़ी के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध करा रही है। हालांकि, ऋण लेने के बाद बड़ी संख्या में लोग उसे समय पर लौटाना भूल गए या लौटाने में असमर्थ हो गए। नतीजतन, जिले में बैंकों के 1290 करोड़ रुपये फंस गए हैं, जो अब एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) की श्रेणी में आ चुके हैं।
विज्ञापन

जिले में कुल 20 बैंकों की 356 शाखाएं संचालित हैं। इनमें इंडियन बैंक अग्रणी बैंक के रूप में कार्य कर रहा है, जिसकी 62 शाखाएं जिले में हैं। जिले का कुल बैंकिंग व्यवसाय करीब 27,140 करोड़ रुपये का है। इसमें 11,490 करोड़ रुपये का ऋण और 15,640 करोड़ रुपये की जमा राशि शामिल है।
बैंकों की ओर से जिले में कृषि क्षेत्र को 6,644 करोड़ रुपये और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को 1,883 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है। ऋण वितरण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वरोजगार और उद्यमिता को मजबूती मिली, लेकिन ऋण अदायगी न होने से बैंकों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
विज्ञापन

लीड जिला प्रबंधक (एलडीएम) अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि समय पर ऋण भुगतान न होने से जिले में 1,290 करोड़ रुपये का ऋण एनपीए हो चुका है। इसमें कृषि ऋण का एनपीए 992 करोड़ रुपये, एमएसएमई ऋण का एनपीए 134 करोड़ रुपये है, जबकि शेष अन्य श्रेणियों में शामिल है। ऋण न चुकाने वालों के खिलाफ आरसी जारी की जा रही हैं। अकेले इंडियन बैंक की ओर से 30 हजार से अधिक आरसी जारी की जा चुकी हैं। संवाद
ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा एनपीए खाते-
बैंकों की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में सबसे अधिक एनपीए खाते ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। जिले के कुल 75 हजार एनपीए खातों में से करीब 55 हजार से अधिक कृषि ऋण खाते ग्रामीण क्षेत्र से संबंधित हैं। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार के लिए लिए गए ऋण भी बड़ी संख्या में एनपीए की श्रेणी में पहुंच चुके हैं। बैंक अधिकारियों के अनुसार कम, सिबिल स्कोर, अस्थिर आय, अधूरे दस्तावेज, आय के अनुपात से अधिक कर्ज और पूर्व में खराब ऋण इतिहास के चलते बैंक ऋण देने में सतर्कता बरत रहे हैं। ऐसे मामलों में समय पर ऋण वापसी को लेकर जोखिम अधिक रहता है, जिससे आवेदन निरस्त या लंबित कर दिए जाते हैं। अधिकारियों ने बताया कि सरकार की कई योजनाओं के जरिये लोग ऋण लेकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं, लेकिन कुछ लोग योजनाओं को रोजगार के बजाय केवल धन प्राप्त करने का जरिया समझ रहे हैं, जिससे एनपीए की समस्या लगातार बढ़ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें