निघासन। उत्तर प्रदेश में खीरी को चीनी के कटोरे नाम से जाना जाता है। जिले के अधिकांश किसान गन्ने की ही खेती पर निर्भर हैं, इसी कारण यहां कई चीनी मिलें और जगह-जगह गन्ना क्रेशर स्थापित हैं। लेकिन, इन्हीं किसानों के बीच निघासन के गांव ढखेरवा खालसा निवासी किसान मनोज पांडेय ने जिमीकंद की खेती को अपनाया है।
तहसील निघासन के गांव ढखेरवा खालसा निवासी किसान मनोज पांडेय ने हाल ही में तीन बीघा में जिमीकंद की बिजाई कराई है। जिमीकंद की खेती अभी जिले में बहुत कम किसान कर रहे हैं, लेकिन इसकी संभावनाएं बेहतर मानी जा रही हैं। सही तकनीक और देखरेख के साथ यह फसल किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।
मनोज पांडेय इससे पहले भी अन्य वैकल्पिक फसलों पर प्रयोग कर चुके हैं, इनमें उन्हें सफलता मिली है। वे अपने गांव में लोकप्रिय जनप्रतिनिधि भी रहे हैं और सामान्य सीट से कई बार प्रधान चुने जा चुके हैं। संवाद
जिमीकंद की खेती से हो रहा अच्छा मुनाफा
किसान मनोज पांडेय का कहना है कि जिमीकंद की खेती में मेहनत जरूर है, लेकिन यदि सही तरीके से देखभाल की जाए तो एक बीघा में 45 से 50 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है। उन्होंने बताया कि इसकी बिजाई फरवरी में की जाती है, इसमें लाइन से लाइन की दूरी करीब ढाई फीट और पौधों की दूरी लगभग दो फीट रखी जाती है। उनके अनुसार गजेंद्र ब्राइटी किस्म जिमीकंद के लिए सबसे बेहतर है। फसल में चार से पांच बार सिंचाई की आवश्यकता होती है। उनका मानना है कि यदि किसान इस फसल की ओर ध्यान दें तो उन्हें अच्छा मुनाफा मिल सकता है।