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‘देश में कंपनी राज नहीं बनने देगा किसान’

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farmer in khiri
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लखीमपुर खीरी। भाकपा माले और अखिल भारतीय किसान महासभा का धरना सातवें दिन रविवार को नसीरुद्दीन मौजी मैदान में जारी रहा। धरने में मौजूद केंद्रीय कमेटी सदस्य कृष्णा अधिकारी ने कहा कि भाजपा सरकार किसान विरोधी है। केंद्र सरकार ने जो अध्यादेश जारी किया है उसके खिलाफ देशभर का किसान लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इसे वापस लेने के बजाय बहुमत का फायदा उठाकर बिल पास करवा लिया। उन्होंने कहा कि सत्ता के मद में मस्त भाजपा को समझना चाहिए कि असली बहुमत जनता है जो इस अध्यादेश के खिलाफ है। इस बार किसान देश में कंपनी राज नहीं बनने देगा। उन्होंने कहा कि सरकारी एवं वन भूमि पर काबिज किसानों का मालिकाना हक दिलवाने के लिए शासनादेश तो जारी कर दिया, लेकिन उसे लागू करने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। जवाहर, रामकिसुन, अच्छेलाल, अलगू, वसंत, सीताराम आदि मौजूद रहे।
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‘किसानों को कॉरपोरेट सेक्टर का गुलाम बनाने की साजिश’
लखीमपुर खीरी। भाजपा सरकार हमेशा से ही किसान विरोधी रही है। दोनों सदनों में पारित हुआ कृषि विधेयक बिल किसानों को कॉरपोरेट सेक्टर का गुलाम बनाने की साजिश है।
कांग्रेस के जिला महामंत्री रवि तिवारी ने कहा कि वन नेशन वन मार्केट की सूली पर किसानों को चढ़ाने वाली केंद्र सरकार की नीयत में खोट है। पूंजीवादी व्यवस्था और निजीकरण की आड़ में जय जवान जय किसान को पुरानी जमींदारी प्रथा को नया स्वरूप दे रही है। अमेरिका ने दशकों पहले खुली बाजार व्यवस्था बनाई और वहां के किसान तबाह हो गए। खुली नीति से सोवियत संघ बिखर गया। भाजपा की नीति देश की बची खुची अर्थव्यवस्था कृषि सेक्टर को पंगु बनाने वाली है। कृषि बिल से मंडी परिषद और न्यूनतम समर्थन मूल्य का खात्मा हो जाएगा। यह देश के अन्नदाता किसानों के साथ विश्वासघात है। कांग्रेस हर स्तर पर इसका विरोध करेगी। संवाद
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फसल पैदा कर कीमत भी तय कर सकेगा किसान: सांसद
निघासन। भाजपा सांसद अजय मिश्र टेनी ने कहा कि किसान अपने खेतों में अपनी मनमर्जी की फसल पैदा करने के साथ ही अब उनकी कीमत भी तय कर सकेगा। विरोधी दल राजनीतिक कारणों से बिल का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने खुद भी अपने घोषणापत्र में इन बिलों को लाने की बात कही थी। वह रविवार को गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
सांसद अजय मिश्र टेनी वे कहा कि किसानों की लंबे अरसे से मांग चली आ रही थी कि अन्य उत्पादकों की तरह उनको भी अपने उत्पादों के दाम तय करने का हक दिया जाए। स्वामीनाथन रिपोर्ट में भी इसकी संस्तुति की गई थी। भाजपा समेत मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी अपने घोषणापत्र में ऐसा कानून बनाने का वादा किया था। पहले भी कांग्रेस ऐसा वादा करती रही है, लेकिन उसने अपनी सरकार बनने पर कभी वादा पूरा नहीं किया। भाजपा ने 2019 में सरकार बनते ही इस पर काम शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि देश के करीब बारह करोड़ परिवार खेती पर आश्रित हैं। 86 फीसदी के पास पांच एकड़ से कम जमीन है। भारत मसाला, फल, सब्जी के उत्पादन में दुनिया में अव्वल है। चावल और गेहूं उत्पादन में दूसरे तथा मछली उत्पादन में तीसरे नंबर पर है। देश की कुल आय का साढ़े सोलह फीसदी खेती से आता है। किसानों की भलाई के लिए ही सरकार ने यह कदम उठाया है। फसल बीमा योजना, किसान सम्मान योजना आदि इसके उदाहरण हैं। संवाद
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