लखीमपुर खीरी। पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों के कोरोना संक्रमित होने के बाद 50 से अधिक की मौत हो चुकी है। इसके अलावा कई कर्मचारी संक्रमित होने के बाद जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। संक्रमित कर्मचारियों की मौत के मामले में सबसे ज्यादा बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की मौत हुई है। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग और मंडी समिति के कर्मचारियों की मौत हुई है। इनके परिवारों को 50-50 लाख रुपये आर्थिक मदद व परिवार के सदस्य को नौकरी देने की मांग विभिन्न संगठनों द्वारा की गई है।
बेसिक शिक्षा विभाग के सबसे ज्यादा 44 शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की अब तक मौत हो चुकी है, जो सभी पंचायत चुनाव की ड्यूटी करने के बाद बीमार हुए थे। इनमें से अधिकतर की मौत का कारण कोरोना संक्रमण बताया जा रहा है, जिनमें कई की टेस्ट रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव भी आ चुकी है। बीएसए दफ्तर के तीन कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। वहीं पीडब्ल्यूूडी विभाग के तीन जेई भी कोरोना संक्रमण की भेंट चढ़ गए। वहीं सिंचाई विभाग के एक एई की मौत हो चुकी है। इसके अलावा मंडी समिति राजापुर के निरीक्षक की मौत भी पंचायत चुनाव की ड्यूटी करने के बाद कोरोना संक्रमण से हुई है। इसके अलावा कई अन्य विभागों के कर्मचारियों की पंचायत चुनाव की ड्यूटी के बाद मौत हो चुकी है। इससे अधिकारी व कर्मचारी दहशत में हैं।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने प्रशिक्षण प्राप्त करने, मतदान कार्य कराने के कारण कोरोना से संक्रमित होकर जान गंवाने वाले शिक्षकों व कर्मियों के परिवारों को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक मदद व परिवार के सदस्य को नौकरी देने की मांग सरकार से की है। जिलाध्यक्ष संतोष मौर्य ने बताया कि पंचायत चुनाव के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक कोरोना संक्रमण का शिकार हुए, जिससे उनकी मौत हुई। अभी भी दर्जनों शिक्षक बीमार पड़े हैं। इसके अलावा राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने भी पंचायत चुनाव की ड्यूटी करने के बाद कोरोना संक्रमण से मौत का शिकार हुए कर्मचारियों के परिवारों को आर्थिक मदद देने की मांग की है।
जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद पुष्कर ने बताया कि इन मांगों के संबंध में डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है।