प्रमुख सचिव चंद्रप्रकाश ने कलक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में जिले की प्राइमरी शिक्षा की स्थिति पर अफसोस जताया। उन्होंने साफ कहा कि पब्लिक स्कूल के बच्चा पॉलिसी नहीं बना सकता, अगर बनाएंगे तो वह फेल हो जाएगा। प्रमुख सचिव ने प्राइमरी शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि पब्लिक स्कूल के बच्चों को गांव और गरीब का दर्द नहीं पता है। ऐसा कुछ कीजिए कि गांव में पढ़ा हुआ बच्चा अधिकारी बने और वह गरीबों के लिए पॉलिसी बना सके। प्रमुख सचिव ने चेताया कि अगर इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आगे चलकर बड़ी समस्या पैदा हो जाएगी। उन्होंने हाल में ही हाईकोर्ट से जारी इस निर्देश का भी हवाला दिया कि राजनेता और अधिकारी अपने बच्चों को प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाएं ताकि शिक्षा-व्यवस्था सुधारी जा सके।
प्रमुख सचिव ने प्रिंसिपल पॉलीटेक्निक, भूमि संरक्षण अधिकारी, सहायक निदेशक मत्स्य समेत कई अधिकारियों से उनकी प्राइमरी शिक्षा के बारे में पूछा। साथ ही उनके द्वारा स्कूलों के निरीक्षण करने की भी जानकारी ली। अधिकतर अधिकारियों ने कहा कि स्कूलों में मिड डे मील, यूनिफार्म वितरण, पाठ्य पुस्तकों का वितरण शुरू हुआ है लेकिन शिक्षा का स्तर गिर रहा है। अधिकारियों का कहना था कि कई जगहों पर बच्चे मिड डे मील लेकर घर चले जा रहे हैं तो वहीं तमाम कार्यों के बोझ तले दबे शिक्षक बच्चों को नहीं पढ़ा पा रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा कि प्राइमरी स्कूल में गणित और अंग्रेजी की पढ़ाई में बच्चे बेहद कमजोर हैं। बैठक में करीब एक घंटे तक प्रमुख सचिव प्राइमरी शिक्षा पर ही अधिकारियों से सवाल-जवाब करते रहे। उन्होंने कहा कि गांव के बच्चे दु:खों-तकलीफों को नजदीक से देखते हैं, उन्हें पता है कि वास्तविक समस्या क्या है। इसलिए गांव के बच्चे पब्लिक स्कूलों के बच्चों के मुकाबले अधिकारी बनने के बाद गांवों के विकास पर अच्छी पॉलिसी बना सकते हैं। इस दौरान सीडीओ नीतिश कुमार ने भी प्रमुख सचिव को जिले की प्राइमरी शिक्षा-व्यवस्था की जानकारी दी।
बीएसए से पूछा-कैसे सुधरेगी व्यवस्था
प्रमुख सचिव ने बैठक में बीएसए ओपी राय से पूछा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए क्या किया जाना चाहिए इस पर बीएसए ने ब्लाकों पर छह माह के अंतराल पर गोष्ठी आयोजित करने और नए और पुराने शिक्षकों को मोटीवेट करने की बात कही। इस पर प्रमुख सचिव ने हर हाल में शिक्षा व्यवस्था सुधारने पर जोर दिया।
मदरसों में भी माडर्न शिक्षा पर जोर
बैठक में अल्पसंख्यक अधिकारी प्रियंका अवस्थी ने बताया कि जिले के मदरसों में भी माडर्न शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। हर मदरसे में बच्चों को साइंस और अंग्रेजी की शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने बताया कि ईसानगर क्षेत्र में मदरसों में बालिकाएं महज धार्मिक ग्रंथ पढ़ने तक ही सीमित हैं। ऐसी बालिकाओं और उनके अभिभावक से संपर्क कर माडर्न शिक्षा के जरिए आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
इंटर के बाद छात्रों को दें स्वरोजगार की शिक्षा
प्रमुख सचिव ने डीआईओएस को निर्देश दिया कि वह इंटर कॉलेजों में जाकर इंटर पास करने वाले छात्रों को स्वरोजगार की जानकारी दें, जिससे आगे चलकर वह कौशल विकास का प्रशिक्षण लेकर रोजगार कर सकें।