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अमेरिका में भी ‘दुधवा लाइव’ ने मचाई धूम

Thu, 14 May 2015 06:13 PM IST
लखीमपुर खीरी
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न्यूयार्क यूनिवर्सिटी ने अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों में ‘दुधवा लाइव’ पत्रिका के लेखों को शुमार किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले अधिकतर पाकिस्तानी छात्रों ने दुधवा लाइव के पक्षियों से संबंधित लेखों पर अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स तैयार की है। 2014 के स्टूडेंट प्रोग्राम लेसन प्लान में दुधवा लाइव के गौरैया संरक्षण से संबंधित लेखों को अध्ययन सामग्री के तौर पर इस्तेमाल किया गया।
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दुधवा लाइव के संपादक कृष्ण कुमार मिश्र ने बताया कि वन्य जीवन और पर्यावरण पर दुनिया की पहली हिंदी ई-पत्रिका ‘दुधवा लाइव’ को इससे पहले वर्ष 2013 में हिंदी के सर्वश्रेष्ठ कार्य के लिए जर्मनी का डायचे वेले संस्थान ‘द बाब्स’ अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान कर चुका है। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने भी वर्ष 2014 में दुधवा लाइव डिजिटल पत्रिका के हिंदी भाषा और पर्यावरण के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए ‘ई-उत्तरा’ पुरस्कार से सम्मानित किया है।
दुधवा लाइव को मिला अंतर्राष्ट्रीय रजिस्ट्रेशन नंबर
दुधवा लाइव अंतरर्राष्ट्रीय मानक के अनुरूप पत्रिका होने के साथ-साथ ही अब यूनेस्को जैसी विशाल वैश्विक संस्था में भी दर्ज हो गई है। इसे आईएसएसएन का अंतरराष्ट्रीय पंजीकरण नंबर मिल गया है। आईएसएसएन का संचालन यूनेस्को कार्यालय पेरिस से होता है और दुनिया भर के ज्ञान को सहेजने में आईएसएसएन सेंटर और यूनेस्को एक दूसरे के पूरक हैं।
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अब रिसर्च पेपर्स भी प्रकाशित कर सकेगा दुधवा लाइव
दुधवा लाइव के संपादक कृष्ण कुमार मिश्र ने बताया कि दुधवा लाइव पर्यावरण और कृषि की हिंदी और अंग्रेजी भाषा की वैश्विक पत्रिका बन चुकी है। दुधवा लाइव में अब लेखों के अलावा वैज्ञानिक शोधपत्र भी प्रकाशित किए जाएंगे। इनकी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अन्य वैज्ञानिक जर्नल्स और पत्रिकाओं की तरह मान्यता होगी।
2010 में शुरू हुई थी दुधवा लाइव
दुधवा लाइव ई-पत्रिका की शुरुआत वर्ष 2010 में वन्य जीवन के संरक्षण और शोध में कार्यरत कृष्ण कुमार मिश्र ने की थी। डिजिटल पत्रिका के माध्यम से उत्तर भारत की तराई के जंगलों की विशेषताओं को विश्व पटल पर पहुंचाने की यह एक कवायद मात्र थी। दुधवा लाइव ने गौरैया बचाओ जैसे सफल अभियान की शुरुआत पांच साल पहले की थी। इसमे तमाम लोग जुड़े।
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