लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल में मिर्गी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार, बीते कुछ महीनों में मानसिक रोग की ओपीडी में आने वाले मरीजों में करीब 35 से 40 प्रतिशत मिर्गी से पीड़ित पाए जा रहे हैं। इनमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। उनका कहना है कि झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़कर समय से उपचार कराने से यह रोग ठीक हो जाता है।
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में प्रतिदिन करीब 150-200 मरीजों की ओपीडी होती है। बीते कुछ महीनों में करीब 35 से 40 प्रतिशत मिर्गी के मरीज आ रहे हैं। जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शुक्ला ने बताया कि इस रोग को लेकर आज भी लोग अंधविश्वास और झाड़-फूंक जैसे तरीकों का सहारा लेते हैं, जबकि मिर्गी का दौरा आने पर रोगी को तुरंत सुरक्षित जगह पर संबंधित व्यक्ति को लिटाना चाहिए। उसके मुंह में कोई वस्तु नहीं डालनी चाहिए। दौरे के बाद मरीज को चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। चिकित्सक की ही देखरेख में दवा और नियमित इलाज की जरूरत होती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि तनाव, नींद की कमी, शराब और नशे का सेवन मिर्गी के दौरे को बढ़ावा दे रहे हैं। गर्भावस्था के दौरान उचित देखभाल न होने पर नवजात में भी मिर्गी की संभावना रहती है। समय पर इलाज न होने से यह गंभीर रूप ले सकती है।
ये हैं बचाव व देखभाल के उपाय
-पर्याप्त नींद लें व तनाव से दूर रहें। दौरे की स्थिति में मरीज को सुरक्षित जगह पर लिटाएं। नशे और अधिक स्क्रीन टाइम से बचें। दवाएं डॉक्टर की सलाह के बिना न छोड़ें। अंधविश्वास से बचकर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।