एक तरफ पंचायत चुनाव और दूसरी तरफ प्रतिदिन हो रही इमरजेंसी बिजली कटौती से लोग बेहद खफा हैं। बिजली न मिलने से एक ओर चुनावी कार्य बाधित हो रहे हैं वहीं बल्कि शहरवासियों को परेशानी हो रही है।
पिछले तीन दिन में सिस्टम कंट्रोल की मनमानी से लगातार तीसरे दिन इमरजेंसी कटौती के कारण दिन में पांच से छह घंटे बिजली काटी गई है। इमरजेंसी कटौती के कारण शहर की बिजली सप्लाई के साथ-साथ पेयजल व्यवस्था भी बुरी तरह चरमरा गई है। उधर बिजली विभाग के अधिकारी सिर्फ ग्रिड पर लोड बढ़ने का हवाला दे रहे हैं, उनके स्तर से बिजली कटौती रोकने संबंधी कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।
शहरवसियों को पिछले तीन दिनों से लगातार इमरजेंसी कटौती का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को तय रोस्टर के मुताबिक सुबह सात बजे से 11 बजे तक बिजली काटी गई। इसके बाद सप्लाई बहाल हुई तो शाम चार बजे के बजाए दोपहर एक बजे ही बिजली गुल हो गई। छाउछ स्थित 132 केवीए उपकेंद्र से बताया गया कि एक बजे से लेकर शाम छह बजे तक सिस्टम कंट्रोल से इमरजेंसी कटौती लागू की गई है। इससे पहले बृहस्पतिवार और शुक्रवार को भी इमरजेंसी कटौती के नाम पर शहर की बिजली सप्लाई काटी गई थी। प्रतिदिन इमरजेंसी कटौती लागू होने से यहां व्यापारियों और शहरवासियों में जबरदस्त आक्रोश है। आरोप है कि लखीमपुर शहर में ही सबसे ज्यादा बिजली कटौती की जा रही है जबकि अन्य जगहों पर लखीमपुर की तुलना में कम बिजली कटौती हो रही है।
अधिशाषी अभियंता रजनीकांत मिश्रा ने बताया कि ग्रिड पर लोड बढ़ने के कारण सिस्टम कंट्रोल के निर्देश पर इमरजेंसी रोस्टिंग की गई है। इसमें स्थानीय स्तर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। यह कटौती सिर्फ लखीमपुर में ही नहीं हो रही है बल्कि ग्रिड से जुड़े सभी शहरों की बिजली कट जाती है।