बांकेगंज। नेपाल के हाथियों के तीनों झुंडों के सोमवार रात बांकेगंज इलाके में इकट्ठे हो जाने के बाद उनका उत्पात और ज्यादा बढ़ गया है। मंगलवार रात सोहनरा भूड़ और जटपुरा गांव में धान और गन्ने की कई एकड़ फसल रौंद डाली, एक हैंडपंप तोड़कर उसे कुचल दिया। वहीं पश्चिम बंगाल से बुलाए गए 24 एक्सपर्ट ट्रैकर्स ने वन कर्मियों की टीम के साथ अपना काम शुरू कर दिया है। ये ट्रैकर्स खासतौर से हाथियों को आबादी की तरफ जाने से रोकेंगे और वापस जंगल भेजने की कोशिश करेंगे।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज की जटपुरा बीट में नेपाल से आए उत्पाती जंगली हाथियों का झुंड अभी इसी बीट के कंपार्टमेंट पांच से सटे सोहनरा भूड़ और जटपुरा गांव के पास डेरा डाल रखा है। मंगलवार शाम करीब सात बजे हाथियों के झुंड ने सोहनरा भूड़ गांव को ओर अपना रूख करने की कोशिश की, लेकिन निगरानी में लगी वन कर्मियों की टीम ने किसी तरह वापस उन्हें जंगल में खदेड़ दिया। लेकिन झुंड रात करीब एक बजे फिर गांव के पास जा धमका। हाथियों ने किसान गेंदन लाल आदि की गन्ने और धान की फसलें उजाड़ दीं। रास्ते में लगे एक हैंडपंप को तोड़कर पैरों से कुचल दिया। हाथियों के चिंघाड़ सुनकर ग्रामीणों की पूरी रात दहशत में ही कटी। कई घंटे उत्पात मचाने के बाद हाथियों का झुंड वापस फिर जटपुरा बीट के कंपार्टमेंट पांच जंगल में लौट गया। निगरानी में लगी वन कर्मियों की टीम में शामिल फॉरेस्टर मोहम्मद उमर, राजेंद्र वर्मा और आकाश खरवार का कहना है कि ये हाथी दिन मेें आराम करते हैं और शाम ढलते ही जंगल से बाहर निकलना शुरू कर देते हैं।
हाथियों के उत्पात से परेशान वन विभाग के अधिकारियों ने यूपी में संबधित विशेषज्ञ न होने के कारण प्रधान मुख्य संरक्षक (वन्यजीव) सुनील कुमार पांडेय के मार्फत पश्चिम बंगाल से एलीफैंट मैनेजमेंट टीम के 24 एक्सपर्ट ट्रैकर्स को बुलाया है। वे रात करीब एक बजे मैलानी रेंज की महुरेना बीट स्थित गेस्ट हाउस पहुंच गए। बुधवार सुबह इन ट्रैकर्स ने वन कर्मियों की टीम के साथ जंगल की भौगोलिक स्थिति की जानकारी लेने के बाद अपना काम शुरू कर दिया है।
एक्सपर्ट ट्रैकर्स मुंह से निकालते हैं विशेष प्रकार की आवाज
पश्चिम बंगाल से बुलाए गए एलीफेंट मैनेजमेंट टीम के ट्रैकर्स आशीष मंडल, संजीत लाईक, सामंत हेम्बरम, दुर्गा, रूनू बौरी आदि ने बताया कि वे एक विशेष प्रकार की आवाज अपने मुंह से निकालते हैं। इससे आबादी के तरफ बढ़ते हाथियों के कदम रुक जाते हैं। उधर अफसरों का कहना है कि इस समय वन विभाग का पहला लक्ष्य इंसानी आबादी को सुरक्षित करने के साथ-साथ हाथियों को भी सुरक्षित रखना है। इन ट्रैकर्स के आने से उम्मीद जताई जा रही है कि हाथी अब जंगल से बाहर अपना रूख नहीं कर सकेंगे।
पश्चिम बंगाल से बुलाए गए एलीफेंट मैनेजमेंट टीम के एक्सपर्ट ट्रैकर्स जिले में पहुंच गए हैं। उन्होंने अपना काम शुरू कर दिया है। हाथियों की लगातार निगरानी की जा रही है। -डॉ. अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, डीटीआर बफरजोन।