बांकेगंज(लखीमपुर) नेपाल के शुक्ला फांटा नेशनल पार्क से 10 हाथियों का दल में रास्ते से करीब 20 हाथियों का एक झुंड और मिल गया। इससे इनकी संख्या अब करीब 30 पर पहुंच गई है। नेपाली हाथियों का यह झुंड वन विभाग के अफसरों को चकमा देता हुआ लगातार आगे बढ़ता जा रहा है। अब तक अधिकारी इन्हें रोकने के लिए कोई ठोस रणनीत नहीं बना सके हैं।
बताते है कि हाथियों यह दल अभी तक किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी वन्यजीव विहार रेंज में ही भ्रमण कर रहा है। गुरुवार रात मड़हा जंगल से हाथियों का दल खीरी ब्रांच,बड़ी नहर के पुल को पार करके बफरजोन की मैलानी रेंज की गदनियां बीट पहुंच गया। इससे पहले रास्ते में उन्होंने खेतों में खड़ी धान की फसल को नुकसान पहुंचाया। हाथियों का एक और दल आने से वन विभाग की मुसीबतें बढ़ गईं है। हालांकि वन विभाग हाथियों के मूवमेंट पर लगातार नजर बनाए हुए है। स्थिति पर नजर रखने के लिए उपनिदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल, एसडीओ दिलीप श्रीवास्तव मैलानी रेंज में मौजूद रहे।
12 साल पहले भी हाथी पहुंचे थे बशीर के खेत में
मैलानी। सुवाबोझ निवासी बुजुर्ग बशीर ने बताया कि नेपाली हाथी इससे पहले करीब 12 साल पहले भी इलाके में आए थे और हाथियों ने उनके जिस खेत को उस समय नुकसान पहुंचाया थाख इस बार भी हाथियों ने उसी खेत में पहुंचकर धान की फसल को खाया है। इससे अंदाज लगता है कि इनमें वे हाथी भी हैं, जोकि पहले भी आ चुके हैं।
यहां उन्हें मिल रहा अनुकूल प्राकृतवास, पर्याप्त भोजन और पानी
भारत और नेपाल के जंगल आपस में जुड़े हुए हैं। करीब 20/25 वर्ष पहले वहां के जंगलों का सफाया होने के बाद वहां के जंगली हाथियों के अनुकूल प्राकृतवास और भोजन/पानी की समस्या पैदा हो गई। दुधवा में आने वाले इन हाथियों को अनुकूल प्राकृतवास,भोजन और पानी के साथ ही सुरक्षा भी मिल रही है। जिसके चलते नेपाल से भारत जो हाथी आ रहे हैंख वह नेपाल की ओर बमुश्किल जा रहे हैं।
आबादी से दूर रखने के लिए विभाग ने किए इंतजाम
डीडी बफरजोन ने बताया कि मैलानी रेंज की महुरेना बीट में मौजूद जंगली हाथियों को आबादी और एनएच 730 पर जाने से रोकने के लिए बाहरी किनारों और जंगल से निकले हाइवे पर रात्रि में मिर्च का धुंआ कराया जाएगा। जिसकी दुर्गंध से हाथी जंगल के बाहर नहीं निकलेंगे।
नेपाली हाथियों का दल डीटीआर बफरजोन और किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी रेंज में भ्रमण कर रहा है। लोगों से अपील है कि हाथियों से छेड़छाड़ न करें। उन्हें निकलने का रास्ता दें,ताकि वे अपने घर वापस जा सके। जंगली हाथियों ने जिन किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है,उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
डॉ अनिल कुमार पटेल,डीडी,डीटीआर,बफरजोन।