कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए चलाए जा रहे राज्य पोषण मिशन के अभियान की सफलता को कलक्ट्र्ेट सभागार में बैठक हुई। इससे पहले डीएम किंजल सिंह ने उप्र टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (यूपीटीएसयू) के अधिशासी निदेशक विकास गोठवाल और एनएचएम की कम्यूनिटी प्रासेज के जीएम डॉ राजेश झा की मौजूदगी में सभी जिला और ब्लाक स्तर के अधिकारियों को जिले को कुपोषण से मुक्त कराने के लिए शपथ दिलाई।
बैठक में यूपीटीएसयू के अधिशासी निदेशक ने दो टूक कहा कि जिले में बुधवार और शनिवार को होने वाले स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस प्रमुखत: टीकाकरण पर ही केंद्रित रहते हैं, जबकि यहां स्वास्थ्य एवं पोषण की अन्य सेवाएं भी प्रदान करने की जरूरत है। गर्भवती महिलाओं की देखभाल, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान, संस्थागत प्रसव, परिवार नियोजन और पोषण सेवाओं को सुधारना सबका दायित्व है। इसमें सभी को लग जाना चाहिए। हर हाल में कुपोषण का खात्मा होना चाहिए और किसी भी गर्भवती अथवा शिशु की मौत नहीं होनी चाहिए। इसी तरह जीएम डॉ राजेश झा ने भी अब तक की कार्यप्रणाली को बदलने का संदेश दिया। वहीं डीएम किंजल सिंह ने व्यवस्था में सुधार लाने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि इस अभियान में किसी भी स्तर पर कोई कमी मिली तो जिम्मेदार कार्रवाई के लिए तैयार रहें। यह अभियान सभी का है और पूरे मनोयोग से इसे सफल बनाना है।
इन अधिकारियों की रही मौजूदगी
सीडीओ नितीश कुमार, एडीएम एसपी सिंह, सीएमओ डॉ वीके साहू, एसीएमओ डॉ बलवीर सिंह के अलावा जिला कार्यक्रम अधिकारी, डीडीओ सहित सभी जिला और ब्लाक स्तर के स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। संचालन बीएसए ओपी राय ने किया।
अभियान का प्रमुख संकल्प
-प्रजनन स्वास्थ्य, मातृ स्वास्थ्य, नवजात शिशु स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य
अधिकारियों को ये दिलाई गई शपथ
लड़का लड़की का भेद नहीं करेंगे, गर्भवती महिलाओं और शिशुओं की समुचित देखभाल करेंगे। टीकाकरण, पोषक आहार, आयरन सहित सभी पोषक पदार्थ देकर उन्हें हर हाल में स्वस्थ रखने के लिए प्रयासरत रहेंगे।
जिले से गांवों तक रणनीति बनाकर काम करने के निर्देश
राज्य पोषण मिशन के तहत गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को स्वस्थ रखने के लिए जिले से गांव तक रणनीति बनाकर काम करने के निर्दश दिए गए हैं। निर्देश के अनुसार यह रणनीति बनाई जाएगी-
जनपद स्तर पर : प्रत्येक विभाग अपने कार्यकर्ताओं को दस पोषण हस्तक्षेपों के बारे में बताएंगे और उनकी ड्यूटी निर्धारित करेंगे।
ब्लॉक स्तर : हर महीने आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दस हस्तक्षेपों के बारे में बताते हुए कार्य की प्लानिंग की जाए। हर तीन माह पर ब्लाक स्तर पर स्वास्थ्य विभाग, आंगनबाड़ी, शिक्षा और विकास विभाग के कर्मचारियों की बैठकें होंगी। इसमें प्रधानों की भी सहभागिता होगी।
गांव स्तर पर : ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस बने। एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गांव में बैठक कर माताओं को सेवा का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें। सही आहार और पोषण संबंधी जानकारी दें। इस दिन जनपदस्तरीय अधिकारी गांव का आकस्मिक भ्रमण करें। प्रचार-प्रसार कराया जाए।
जब डीएम ने खोल दी सेहत महकमे की पोल
डीएम किंजल सिंह ने उप्र टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (यूपीटीएसयू) के अधिशासी निदेशक विकास गोठवाल और एनएचएम की कम्यूनिटी प्रासेज के जीएम डॉ राजेश झा की मौजूदगी में माइक्रोप्लानिंग करने की बाबत पूछा। किसी को भी जवाब न देते देख उन्होंने कहा कि पिछले दिनों उन्होंने खुद सीएमओ के यहां बैठकर प्लानिंग की थी। यह काम मौके पर होना चाहिए, जो नहीं हो रहा है। साथ ही उन्होंने चेताया कि इसे करना होगा। इस तरह डीएम ने सेहत महकमे द्वारा इस मिशन के तीनों पहलू माइक्रोप्लानिंग, मॉनीटरिंग और रेवन्यू के बावत लापरवाही को बयां कर सेहत महकमे की पोल खोल दी।
कुपोषण दूर करने के दस हस्तक्षेप
-जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपाल की शुरुआत
-छह माह : शिशु को सिर्फ मां का दूध, पानी भी नहीं
- छह माह बाद मां के दूध संग पोषक आहार भी
-बढ़ती आयु के साथ आहार बढ़ाना, संग में मां का दूध
-छह माह बाद बच्चों को विटामिन ए, आयरन सहित अन्य पोषक तत्वों से आच्छादित करना
-बीमारियों से बचाव के लिए साफ सफाई पर ध्यान
-बीमारी के समय भी बच्चे का आहार जारी रखना
-तीव्र कुपोषण वाले बच्चों का उचित प्रबंधन
-किशोरियों में एनीमिया की रोकथाम
-गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की रोकथाम, देखभाल (वजन की निगरानी, एक अतिरिक्त आहार और चार स्वास्थ्य जांचें)