बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व के साथ दक्षिण खीरी वन प्रभाग को मिलाकर तराई एलीफैंट रिजर्व बनने के बाद तराई क्षेत्र में हाथियों के संरक्षण और संवर्धन को नए आयाम मिले हैं। अब हाथियों को पुराने कॉरिडोर को व्यवस्थित करने के साथ नए कॉरिडोर तलाशने और उनके बनाने का काम किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में पहले हाथी रिजर्व को अक्टूबर 2022 में मंजूरी मिली थी। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही प्रदेश के दुधवा-पीलीभीत तराई क्षेत्र में तराई एलिफैंट रिजर्व में हाथियों के संरक्षण और संवर्धन का काम तेज हो गया है। अब यहां बड़ी संख्या में हाथी की आबादी को सरंक्षण मिलेगा।
यह देश का 33वां तथा उत्तर प्रदेश का पहला हाथी रिजर्व है। इसके अस्तित्व में आने के साथ ही दुधवा नेशनल पार्क उत्तर प्रदेश का अकेला राष्ट्रीय उद्यान बन गया है। जो चार प्रतिष्ठित जंगली प्रजातियों -बाघ, एक सींग वाले गैंडे, एशियाई हाथी और दलदली हिरण की रक्षा और संरक्षण किया जा रहा है।
3049 वर्ग किलोमीटर में फैला है यूपी का पहला हाथी रिजर्व
हाथी अभयारण्य में डीटीआर, पीटीआर समेत दक्षिण खीरी वन प्रभाग का 3,049.39 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल शामिल है। इसमें डीटीआर 2200 पीटीआर 730 और दक्षिण खीरी वन प्रभाग का 172 वर्ग किलोमीटर का जंगल शामिल होगा। क्षेत्रफल के लिहाज से यह देश का आठवां सबसे बड़ा एलिफैंट रिजर्व है। वर्ष 2019 में हुई गणना के मुताबिक, प्रदेश में कुल 352 हाथी हैं, जबकि अकेले दुधवा में 205 से ज्यादा हाथी हैं।
जंगली हाथियों को आकर्षित किया
डीटीआर ने दशकों से विभिन्न घरेलू और सीमा पार गलियारों के माध्यम से जंगली हाथियों को आकर्षित किया है। जिसमें बसंता-दुधवा, लालझड़ी (नेपाल)-सठियाना और शुक्लाफांटा (नेपाल)-ढाका-पीलीभीत-दुधवा बफर जोन कॉरिडोर शामिल हैं। दुधवा हाथी परियोजना के तहत तराई हाथी रिजर्व इन गलियारों को पुनर्जीवित करने या बहाल करने में मदद करेगा, जिन्हें छोड़ दिया गया है।
तराई हाथी अभ्यारण्य की स्थापना के बाद से दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बेहतर ढंग से हाथियों का रखरखाव हो रहा है। मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
- ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर, तराई हाथी रिजर्व