नवसृजित भीरा नगर पंचायत में सात प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित है। ग्राम पंचायत से नगर पंचायत बने भीरा कस्बे में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
लखीमपुर खीरी में ग्राम पंचायत से नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बाद भीरा नगर पंचायत में पहली बार मतदाता अपने चेयरमैन का चुनाव करेंगे। नवसृजित इस भीरा नगर पंचायत में सात प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। बात अगर ग्राम पंचायत की हो तो यहां पर अभी भी काफी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। पानी निकास, सड़क समेत कई ऐसी दिक्कतें हैं, जिनको दूर करना काफी हद तक जरूरी है।
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नवसृजित भीरा नगर पंचायत में भीरा के मजरा चक, पसियापुर, सुजान टांडा, नौगवां, पंचवटी फार्म, सुंदरनगर तांगिया, मन्नाटांडा, रामकुमार टांडा, फार्म टांडा, सलामतनगर, खैरा फार्म आदि को नगर पंचायत में शामिल किया गया है।
नगर पंचायत में कुल 15 वार्ड बनाए गए हैं, जिसमें आंबेडकर नगर, शिवनगर, अयोध्यानगर, महावीर नगर, किसाननगर, अब्दुल कलाम नगर, कृष्णानगर, स्वामी विवेकानंद नगर, गुरुनानक नगर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर, मां कल्याणी देवी नगर, अशफाक उल्ला खां नगर, शहीद भगत सिंह नगर, महाराज अग्रसेन नगर, हुसैनी नगर आदि शामिल किए गए हैं। यहां के मतदाता पहली बार नगर पंचायत के अध्यक्ष का चुनाव करेंगे।
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किशनपुर सेंचुरी से है भीरा की खास पहचान
विश्वविख्यात दुधवा नेशनल पार्क की किशनपुर सेंचुरी जाने के लिए भीरा होकर ही किशनपुर जाया जाता है। जिसको लेकर सैलानियों की भीड़ भी यहां लगती है। इससे ही भीरा कस्बा की खास पहचान है। इसके अलावा एक प्राइवेट बड़ा अस्पताल भी है जिसकी भी ख्याति दूर-दूर तक है।
नगर पंचायत की कुर्सी पर पहली अध्यक्ष बनेगी महिला
भीरा नगर पंचायत महिला सीट हुई है। ऐसे में मतदाता जिस भी महिला को चुनेंगे, वह भीरा नगर पंचायत की पहली महिला अध्यक्ष होंगी।
एक नजर में भीरा नगर पंचायत
क्षेत्रफल- 6 वर्ग किलोमीटर
वार्डों की संख्या- 15
जनसंख्या करीब 30 हजार
कुल वोटर- 18802
महिला- 9027
पुरूष- 9775
युवा मतदाता- 4000
आर्थिक ढांचा
नौकरी पेशा- 15 प्रतिशत
खेती किसानी- 40 प्रतिशत
व्यापारी- 20 प्रतिशत
मजदूरी- 15 प्रतिशत
ये प्रत्याशी चुनाव मैदान में
1- राजकुमारी- भाजपा
2- आफरीन- बसपा
3- चारू शुक्ला- निर्दलीय
4- प्रीति शुक्ला- निर्दलीय
5- प्रेरणा शुक्ला- निर्दलीय
6- कल्पना- निर्दलीय
7- सपना- निर्दलीय
- पानी निकास की समुचित व्यवस्था न होना।
- सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें न होना।
- साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था न होना।
- जर्जर सड़कें व कहीं पर रोड ही न होना।
- आवारा पशुओं की समस्या।
- सरकारी मैरिज हाल न होना
क्या कहते हैं मतदाता
पीयूष अग्रवाल ने बताया कि कस्बा की जर्जर सड़कें हैं, जबकि सबसे बड़ी समस्या गरीब बेटियों के विवाह के लिए मैरिज हाल न होने की है। बाकी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। अंकुश गर्ग ने कहा कि काफी मांगों के बाद नगर पंचायत का दर्जा तो मिल गया है, लेकिन यहां समस्याएं भी भरपूर हैं। जिनमें साफ-सफाई व पानी निकास की व्यवस्था सबसे बड़ी है।
वंश बताते हैं कि आवारा पशुओं की समस्या है, जबकि जर्जर सड़कें भी कस्बा में कई जगह हैं। कहीं तो रोड ही नहीं है, जर्जर रास्ते से लोग गुजरते हैं। गोल्डी धामी ने कहा कि नगर पंचायत का दर्जा मिल गया है लेकिन नगरीय सुविधा यहां पर नहीं है। नगर के हिसाब से यहां पर सुविधाएं भी होनी चाहिए, जिससे सहूलियत मिल सके।