कोहरा सिर्फ दुर्घटनाओं का ही सबब नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद
खतरनाक है। इससे स्नोफीलिया, फेशियल पेल्सी सेनोसाइटिस और उच्च रक्तचाप की
आशंका रहती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण में कोहरा दो तरह का होता है। पहला
एडवेकशन और दूसरा रेडिएशन कोहरा। प्रदूषण और भूमि के उपयोग के तरीकों और
कोहरे की आवृत्ति में सीधा संबंध है। क्योंकि प्रदूषण के तत्व संघनन के बाद
प्रचुर सतह उपलब्ध कराते हैं इसलिए धुंध की चादर नजर आती है।
कोहरा
दुर्घटनाओं का कारण तो बनता ही है, साथ ही यह स्वास्थ्य के लिए भी बेहद
खतरनाक है। कोहरे में अधिक समय तक रहने से स्नोफीलिया, फेशियल पेल्सी
(चेहरे का लकवा), जुकाम, सेनोसाइटिस और रक्तचाप की आशंका रहती है। चिकित्सक
कोहरे से बचने की सलाह देते हैं।
ऐसे पड़ता है स्वास्थ्य पर प्रभाव
फिजीशियन
डॉ. रवींद्र्रनाथ वर्मा ने बताया कि कोहरे में पाई जाने वाली नमी सांस के
माध्यम से फेफड़ों तक पहुंचती है। इससे स्नोफीलिया का खतरा बढ़ जाता है।
कानों के पास से गुजरने वाली चेहरे की नसों में नमी का प्रभाव बढ़ने से
फेशियल पेल्सी (चेहरे का लकवा) की आशंका रहती है। नाक के माध्यम से कोहरे
की नमी जुकाम और सेनोसाइटिस को जन्म देती है। कोहरे वाले क्षेत्र में
ऑक्सीजन कम होने से उच्च रक्तचाप की भी समस्या सामने आती है।
ऐसे करें बचाव
- कोहरे में निकलने से पहले सिर पर कैंप जरूर पहनें
- कान और नाक को गर्म कपड़े से ढककर रखें
- असहज होने पर योग्य चिकित्सक की तुरंत सलाह लें