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स्कूलों में कोविड-19 से बचाव के इंतजाम में बजट का अड़ंगा

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लखीमपुर खीरी। कोरोना काल में स्कूलों को खोलना राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालय के प्रधानाचार्यों के लिए मुसीबत बन गया है। कोरोना से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए शासन के निर्देशों का पालन करने के लिए प्रधानाचार्यों के आगे बजट की दिक्कत आएगी। प्रधानाचार्य बताते हैं कि सरकार ने कोविड-19 से बचाव के इंतजाम करने के निर्देश तो जारी कर दिए, लेकिन बिना बजट के इनकी व्यवस्था कर पाना संभव नहीं है।
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जिले में 52 राजकीय विद्यालय तो 45 सहायता प्राप्त स्कूलों की संख्या है। राजकीय विद्यालयों को रखरखाव व मरम्मत के लिए वार्षिक बजट मिलता है। जबकि सहायता प्राप्त स्कूलों को सिर्फ शिक्षकों का वेतन दिया जाता है। नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कक्षा आठ तक की पढ़ाई भी मुफ्त है। ऐसी स्थिति में राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालय के प्रधानाचार्य बेहद मुश्किल में हैं। इनका कहना है कि अभी बोर्ड परीक्षा से पहले सीसीटीवी कैमरे लगवाए, जिस पर अच्छा खासा पैसा खर्च हुआ। स्कूलों के भी कई खर्चे हैं। ऐसे में स्कूल खुलने पर छात्रों को कोरोना से बचाव के इंतजाम करने में दिक्कत आएगी। प्रधानाचार्य बताते हैं कि प्रत्येक पाली से पहले क्लासरूम, गेट और परिसर को सैनिटाइज कराना, थर्मल स्कैनर, ऑक्सोमीटर खरीदना, बिना मास्क वालों को मास्क उपलब्ध कराना। यह सब बिना बजट के कैसे संभव होगा। शिक्षक नेताओं का कहना है कि सरकार को चाहिए वह कोविड-19 से बचाव के संसाधनों की व्यवस्था करने के लिए विद्यालयों को धनराशि दे।
रोजाना 15 सौ रुपये तक का आएगा खर्च
राजकीय एवं सहायता प्राप्त स्कूलों के प्रधानाचार्यों का कहना है कि कोविड काल में स्कूल खोलने के लिए सरकार ने जो निर्देश दिए हैं उनका पालन करने में रोजाना 15 सौ रुपये तक का खर्च आएगा। स्कूल गेट एवं परिसर सैनिटाइज करने के लिए सोडियम हाइपोक्लोराइड, हाथ सैनिटाइज करने के लिए स्प्रे वाला लिक्विड सैनिटाइजर के साथ मास्क और मशीन आदि की व्यवस्था करनी होगी। एक प्रधानाचार्य ने बताया कि राजकीय स्कूलों में कर्मचारी तक नहीं हैं। सैनिटाइज कराने के लिए भी एक कर्मचारी लगाना होगा। वह भी पारिश्रमिक लेगा। बिना बजट मिले यह सब कैसे संभव होगा।
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छात्र हित में स्कूल खुलना जरूरी है। कोविड से बचाव के लिए गाइड लाइन निर्धारित है उसका पालन करने के लिए शासन को बजट देना चाहिए। शिक्षकों की कमी के चलते दोनो पालियों के साथ ऑनलाइन पढ़ाई कराने में भी दिक्कत होगी।
-राजेंद्र कुमार आर्य, अध्यक्ष, राजकीय शिक्षक संघ
प्रत्येक पाली में रोजाना विद्यालय परिसर को सैनिटाइज कराने से लेकर अन्य इंतजाम करने में रोजाना करीब 15 सौ रुपये का खर्च आएगा। इसके लिए सरकार को बजट भी देना चाहिए।
-अरविंद वर्मा, जिलाध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ
स्कूल में सैनिटाइजेशन और साफ-सफाई की जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधन की है। शासन के निर्देशों का राजकीय, माध्यमिक एवं वित्तविहीन स्कूलों के प्रधानाचार्यों को पालन करना होगा। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
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-हयात अली अंसारी, डीआईओएस
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