लखीमपुर खीरी। कोरोना काल में पहले लॉकडाउन फिर उसके बाद बने अनिश्चितता के माहौल से परेशान हजारों अभिभावकों ने अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराया है, नए दाखिलों में काफी बढ़ी संख्या विभिन्न निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की मानी जा रही है। बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों में अब तक ऐसे करीब 22 हजार बच्चों के नए दाखिले किए जा चुके हैं। यहां बता दें पिछले साल कुल 5.32 हजार बच्चे पंजीकृत थे, इस साल इन बच्चों की संख्या बढ़कर करीब 5.54 लाख तक पहुंच गई है। अब भी परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक प्रवेश लिए जा रहे हैं, जिससे निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों में दाखिला कराने वाले अभिभावकों की संख्या बढ़ सकती है। ऐसे में विभाग के पास भी अब यह अवसर होगा कि अपनी खोई हुई साख को फिर से हासिल करे।
जनपद में 3856 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें पिछले सत्र में 5.32 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इस वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते नए शिक्षा सत्र की विधिवत शुरुआत नहीं हो पाई है, लेकिन परिषदीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के प्रवेश किए जा रहे हैं। कक्षा एक से आठ तक प्रवेश के लिए टीसी की भी जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि उम्र के हिसाब से किसी भी कक्षा में प्रवेश कराने की सहूलियत भी मिल रही है। तो वहीं बच्चों को निशुल्क किताबें, यूनिफार्म बांटी जा चुकी हैं और स्वेटर बांटने की तैयारी चल रही है। एमडीएम का अनाज और कन्वर्जन कास्ट का पैसा भी बच्चों और अभिभावकों को दिया जा रहा है। निजी स्कूलों में महंगी फीस जमा न कर पाने से परेशान हजारों अभिभावकों ने इन्हीं सरकारी विद्यालयों में अपने बच्चों का दाखिला करा दिया है। खासकर अंग्रेजी माध्यम से संचालित किए जा रहे प्राथमिक विद्यालयों में नए बच्चों के प्रवेश की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जनपद में 225 से अधिक प्राथमिक विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम से संचालित किया जा रहा है।
रतसिया में 110 नए बच्चों के हुए दाखिले
बेहजम ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय रतसिया (अंग्रेजी माध्यम) में कोरोना काल के दौरान 110 नए बच्चों के दाखिले किए गए हैं। दो साल पहले तक यहां 70 बच्चे पंजीकृत थे। 2018 में अंग्रेजी माध्यम होने के बाद इसमें नए दाखिलों की संख्या बढ़ती गई, जिससे यहां अब 415 बच्चे पंजीकृत हैं। प्रधानाध्यापक प्रमोद वर्मा ने बताया कि नए सत्र में 110 नए बच्चों के दाखिले किए हैं, जिनमें 80 बच्चे निजी स्कूलों को छोड़कर आए हैं। उन्होंने बताया कि अभिभावकों की देखरेख में बच्चों को रोटेशन (10:10) में बुलाकर होमवर्क भी दिया जा रहा है। विद्यालय परिसर को व्यवस्थित तरीके से संवारा गया है, जिसमें अभिभावकों की मदद से प्रधानाध्यापक ने भी निजी स्कूलों की भांति पढ़ाई कराने का प्रयास किया हैै।
बच्चों को लुभा रहा परिषदीय स्कूलों का नया अवतार
नकहा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय अटकोहना को भी 2018 में अंग्रेजी माध्यम से संचालित किया जा रहा है। प्रधानाध्यापिका कुहू बैनर्जी ने गुणवत्तापूर्ण एवं आनंददाई शिक्षा का नवाचार करते हुए विद्यालय की तस्वीर बदल दी है। शिक्षिका ने बिना बाउंड्री, बिना बिजली, बिना स्वच्छ जल वाले विद्यालय को अपने और ग्रामीणों के सहयोग से विद्यालय में खेलकूद की सामग्री लगाई है। इसमें सरकारी धन का प्रयोग नहीं किया गया। शिक्षिका ने चारों ओर ऊंची चाहरदीवारी, गेट, बिजली एवं समर्शिबल पंप उपलब्ध करवाया है। दो सालों में विद्यालय आकर्षक हो गया है। अध्यापिका ने बच्चों के लिए 50 हजार की लागत से झूला पार्क विद्यालय को समर्पित किया है। विद्यालय की दीवारों पर स्वयं आकर्षक चित्रकारी कर सुसज्जित किया है, जिस स्थान पर घास का तिनका तक नहीं था, वहां अब आम, शीशम, जामुन, गुड़हल, चांदनी, अमरूद के पौधे लहरा रहे हैं। दो वर्षो में विद्यालय में नए प्रवेश की संख्या 206 से 422 तक पहुंच गई है। शिक्षिका ने अपनी सहायक अध्यापिकाओं नीति वर्मा और स्वाति को सफलता का श्रेय दिया है।
करीब 5.54 लाख बच्चों के प्रवेश होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 22 हजार छात्र संख्या अधिक है। अब भी नए प्रवेश किए जा रहे हैं, जो 31 अक्तूबर 2020 तक होंगे। निजी स्कूलों के बच्चों के भी दाखिले परिषदीय विद्यालयों में कराए जा रहे हैं।
-बुद्ध प्रिय सिंह, बीएसए