फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिंदी को पढ़ने से उर्दू भी समझ में आएगी

विज्ञापन
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी। युवराज दत्त महाविद्यालय में शनिवार को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ एवं वाईडी कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय अंतरा अनुशासनीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसका विषय उत्तर मध्यकालीन भारत में हिंदी साहित्य और सौंदर्य दृष्टि का अस्मिता संघर्ष रहा।
विज्ञापन

गोष्ठी का उद्घाटन सिद्घार्थ विश्वविद्यालय सिद्घार्थनगर के कुलपति प्रोफेसर सुरेंद्र दुबे ने मां सरस्वती का पूजन कर किया। लखनऊ विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि सौंदर्यशास्त्र दर्शन का विषय है जबकि सौंदर्यशास्त्र के कवियों ने इसे संवेदन का शास्त्र बताया है जिसके रुप रस, गंध, स्पर्श और शब्द हैं। इसकी व्याख्या करते हुए उन्होंने रीतिकालीन कवियों के ग्रंथों पर प्रकाश डाला।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी गजलकार वशिष्ठ अनूप ने कहा कि हिंदी कविता को ध्यान से पढ़ने पर उर्दू भी समझ में आने लगती है। प्रोफेसर सदानंद गुप्ता ने कहा कि जब युग बदलता है तो साहित्य को देखने की दृष्टि भी बदलती है इसी के चलते रीतिकालीन को पलायनवादी काल कहा गया। संगोष्ठी का संचालन प्रयागराज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मित्रसेन सिंह ने किया। इस दौरान हिंदी संस्थान की डॉ. अमिता दुबे, प्राचार्य डॉ. डीएन मालपानी, डॉ.सुभाष चंद्रा, डॉ.नीलम त्रिवेदी सहित छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें