दुधवा नेशनल पार्क के कर्मियों की हड़ताल में अब इलाके की ईको विकास समितियां भी शामिल हो गईं हैं। बुधवार को ईको विकास समितियों के सदस्य पलिया स्थित दुधवा मुख्यालय पहुंचे, जिसमें आदिवासी थारू जनजाति क्षेत्र समेत इलाके की तमाम महिलाएं भी शामिल रहीं। उन्होंने मुख्यालय में प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग की।
बुधवार को दुधवा मुख्यालय में एकत्र समिति अध्यक्ष और महिला सदस्यों ने आंदोलन को सही बताते हुए प्रदर्शन और नारेबाजी कर डीएम को हटाने की मांग की। इस दौरान फेडरेशन ऑफ फारेस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष पतिराज सिंह ने कहा कि दुधवा जंगल की हिफाजत उनकी ड्यूटी का हिस्सा है, लेकिन जब कर्मियों का शोषण, अभद्रता और बेवजह उत्पीड़न होगा तो वह भी मजबूर हो जाएंगे। उपाध्यक्ष रामकुमार ने कहा कि डीएम के इशारे पर पूरा जिला प्रशासन और स्थानीय स्तर षड़यंत्र रचने में जुटे हुए हैं, एक रोज पहले थारू ग्रामीणों द्वारा किए गए धरना प्रदर्शन को भी उन्होंने इसी का हिस्सा बताया। ईको विकास समिति चलतुआ के अध्यक्ष रामदयाल ने आरोप लगाया कि डीएम और उनके साथ आए लोगों ने 27 जनवरी को किशनपुर में हंगामा काटा। बैरियर पर मौजूद कर्मी को पीटा गया जो ऐसे अधिकारी को कतई शोभा नहीं देता। कहा कि पीपी सिंह अच्छे अधिकारी हैं और उन्होंने दुधवा और ईको विकास समितियों के लिए बहुत कुछ किया। मांग की कि पीपी सिंह को वापस लाया जाए और डीएम को यहां से हटा दिया जाए।
दुधवा में जायका की 34 और विश्व बैंक की 66 समितियां
दुधवा क्षेत्र में जायका परियोजना की करीब 34 और विश्व बैंक की 66 समितियां हैं। जिसके जरिये दुधवा जंगल से सटे गांवों की महिलाओं का समूह बनाकर उनको रोजगार दिया जाता है। समितियों के जरिये गांवों के विकास का कार्य होता है। इन्हीं समितियों को ईको विकास समिति कहते हैं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर संस्थान में शामिल
दुधवा कर्मियों के साथ डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल संस्थान मैलानी भी शामिल हुआ है। उसके अध्यक्ष रामदयाल मौर्य भी यहां पहुंचे और उन्होंने अपना समर्थन दिया।
आंदोलन को दबाने के प्रयास का आरोप
फेडरेशन आफ फारेस्ट का आरोप है कि प्रशासन आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने ने एफडी संजय सिंह के खिलाफ भी नारेबाजी करते हुए उन पर प्रशासन के इस प्रयास में साथ देने का आरोप लगाया।