लखीमपुर खीरी। तराई में मानव-बाघ संघर्ष रोकने के लिए प्रभावित जिलों में अर्ली वार्निंग सेंटर बनेंगे। इन केंद्रों पर कंप्यूटर के माध्यम से लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। फिलहाल चार अर्ली वार्निंग सेंटर दुधवा, पीलीभीत, बहराइच और लखनऊ में स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही बाघमित्रों और गजमित्रों की संख्या बढ़ाने का भी निश्चय किया गया है। यह मित्र मानव-बाघ और मानव हाथी संघर्ष रोकने में सूचना तंत्र का काम करेंगे।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर बी. प्रभाकर ने बताया कि लखनऊ में मंगलवार को वनमंत्री की अध्यक्षता में वनाधिकारियों की हुई उच्चस्तरीय बैठक में मानव-बाघ संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता जताई गई और इसकी रोकथाम के लिए जरूरी उपाय करने पर जोर दिया गया। मानव-बाघ संघर्ष के कारणों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। जंगल के आस पास हो रही गन्ने की खेती को मानव बाघ संघर्ष का बड़ा कारण बताया गया।
बैठक में यह भी तय किया गया कि मानव-बाघ या मानव-हाथी संघर्ष में मृतकों और घायलों को मुआवजा देने के लिए विशेष फंड की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया ताकि मुआवजे की राशि जल्दी उपलब्ध कराई जा सके।
फिलहाल चार जिलों में बनेंगे वार्निंग सेंटर
मानव-बाघ संघर्ष रोकने के लिए फिलहाल लखीमपुर खीरी के दुधवा, पीलीभीत और बहराइच और लखनऊ में अर्ली वार्निंग सेंटर बनाने का निर्णय लिया गया है। यह केंद्र कंप्यूटर से लैस होंगे और एक एप से जोड़े जाएंगे। बाघों और हाथियों के जंगल से बाहर निकलते ही उस एप के जरिए अर्ली वार्निंग सेंटर को पता चल जाएगा कि किस इलाके में की ओर रुख कर रहे हैं। इसका पता चलते ही संबंधित वनाधिकारियों और कर्मचारियों को सूचित किया जाएगा। इससे समय रहते बाघ, तेंदुआ या हाथी की निगरानी कर उसे वापस जंगल में भेजने के साथ ग्रामीणों को सतर्क कर मानव संघर्ष को रोका जा सकेगा।
बाघमित्रों की संख्या में होगी बढ़ोतरी, गजमित्र भी बनाए जाएंगे
मानव-बाघ संघर्ष रोकने के लिए बाघमित्रों की संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी। साथ ही तराई हाथी रिजर्व बनने के बाद संभावित मानव हाथी संघर्ष के मद्देनजर पर्याप्त संख्या में गजमित्र बनाए जाएंगे। यह बाघमित्र और गजमित्र मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह बाघों और हाथियों की सुरक्षा की चिंता करने के लिए साथ ग्रामीणों को इनसे बचाव और समन्वय स्थापित करने के लिए जागरूक करेगे। यहां बाघ मित्र पहले ही बनाए जा चुके हैं। इस क्षेत्र में गजमित्र पहली बार बनाए जा रहे है।
प्रदेश मुख्यालय पर हुई उच्चस्तरीय वनाधिकारियों की बैठक में मानव-बाघ और मानव-हाथी संघर्ष रोकने के लिए अर्ली वार्निंग सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। जल्दी ही इस पर काम शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही बाघमित्र और गजमित्र बनाए जाएंगे, जो मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने में मदद करेंगे।
बी प्रभाकर, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व