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बारिश में टमाटर हुआ और लाल, शिमला मिर्च भी तीखी

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बाजार में सब्जी बेंचता दुकानदार - फोटो : LAKHIMPUR
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बारिश के चलते बाजार ने सब्जियों की आवक कम होने से थाली का स्वाद बिगड़ गया है। पिछले पंद्रह दिनों के मुकाबले बाजार में सब्जियों की आवक काफी कम हुई जिस कारण कीमतों में डेढ़ गुना तक बढ़ोतरी हो गई। टमाटर, शिमला मिर्च के दाम काफी बढ़े। हालांकि प्याज सस्ता हुआ है। आवक कम होने से फुटकर दुकानदारों ने सब्जियों के दाम बढ़ा दिए।
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करीब 15 दिन पहले तक 20 से 30 रुपया प्रति किलो बिकने वाला टमाटर गुरुवार को 40 रुपये से 50 रुपया प्रति किलो बिका। हालांकि टमाटर का थोक भाव अभी तीन से चार हजार रुपया प्रति क्विंटल ही है। फुटकर बाजार में आते-आते इसका मूल्य बढ़ गया। गोला के सब्जी आढ़ती जमाल अहमद राइन का कहना है कि एक तो टमाटर इस मौसम में यहां पैदा नहीं होता, दूसरे बरसात के मौसम में टमाटर खराब होने का खतरा रहता है। इसलिए बरसात में टमाटर महंगा हो जाता है।
आलू, प्याज, लौकी, कद्दू, परवल घुइयां, शिमला मिर्च आदि के मूल्यों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। प्याज 30 रुपये से 35 रुपया प्रति किलो और आलू 15 से 20 रुपया प्रति किलो की दर से बिक रहा है। करेला, भिंडी, शिमला मिर्च आदि के दाम आज भी वही हैं जो 15 दिन पहले थे। फुटकर में ज्यादातर सब्जियों के दाम बढ़े हैं।
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सब्जी के मूल्यों का तुलनात्मक विवरण(मूल्य प्रति किलो)
सब्जी...............आज का मूल्य.............15 दिन पहले
टमाटर...............40-50 रुपया............20-30 रुपया
आलू....................20 रुपया..................10-12 रुपया
प्याज....................30 रुपया..................20 रुपया
धनिया..............100-120 रुपया................80 रुपया
लौकी...............20-30रुपया..............15-30 रुपया
कद्दू...................25 रुपया.................20 रुपया
करेला................30 रुपया.................20-30 रुपया
घुइयां.................25 रुपया......................20 रुपया
भिंडी.................30 रुपया..................30 रुपया
शिमला मिर्च........80 रुपया......................60 रुपया
परवल................30 रुपया......................40 रुपया
बरसात में महंगी हो जाती है सब्जी
गोला के सब्जी आढ़ती जमाल अहमद राइन का कहना है कि बारिश में खेतों में पानी भर जाता है, जिससे सब्जी नहीं निकल पाती है। इससे आढ़तों पर सब्जी की आवक कम हो जाती है। यही वजह है कि सब्जियां महंगी हो जाती हैं। वहीं इस मौसम में अपने यहां टमाटर पैदा नहीं होता, दूसरे बरसात के मौसम में टमाटर खराब होने का खतरा रहता है, इसलिए बरसात में टमाटर महंगा हो जाता है।
जमाल अहमद राइन, सब्जी आढ़ती।
हरी सब्जियां हो जाती हैं खराब
बरसात में हरी सब्जियों तोरई, लौकी, कद्दू, भिंडी आदि खेतों में ही खराब हो जाती हैं, क्योंकि एक दिन भी पानी बरसा तो उस दिन सब्जी तोड़ी नहीं जा सकती। बरसात में रास्तों पर कीचड़ होने के कारण वाहन खेत तक नहीं पहुंच पाते। इससे खेतों में ही सब्जियां खराब हो जाती हैं। वहीं पानी बरसने के कारण मजदूर भी नहीं मिलते, जो सब्जी तोड़ने पर राजी होते हैं, वह अधिक पैसे की डिमांड करते हैं, इसीलिए बरसात में जहां सब्जियां आनी कम हो जाती हैं, वहीं महंगाई भी होती है।
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मोहम्मद जहीर, सब्जी आढ़ती।
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