दुधवा के जंगल में पेड़ पर बैठा तेंदुआ। स्रोत : वन विभाग।
लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) में अब बाघों की धारियों के साथ तेंदुओं के चितकबरे शरीर की पहचान भी कैमरों की तस्वीरों से होगी। वर्ष 2026 की बाघ गणना में पहली बार तेंदुओं को भी शामिल किया गया है।
दिसंबर 2025 से मई 2026 तक दुधवा, किशनपुर अभयारण्य, बफर जोन और कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार में लगाए गए 1,800 कैमरों की तस्वीरों का भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) देहरादून के विशेषज्ञ अध्ययन कर डिजिटल डाटा तैयार कर रहे हैं। परिणाम वर्ष 2027 में आएंगे।
डीटीआर में बाघों की संख्या का आकलन करने के लिए हर चार साल बाद कैमरे लगाए जाते हैं। इस बार कैमरों में बाघों और तेंदुओं की डेढ़ लाख से अधिक तस्वीरें कैद हुई हैं। पांच माह तक एकत्र कैमरा डाटा जून के पहले सप्ताह में भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून भेजा गया। वैज्ञानिक अब तस्वीरों का गहन अध्ययन कर रहे हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच. राजामोहन ने बताया कि वर्ष 2027 में गणना के परिणाम आने के बाद बाघों और तेंदुओं की संख्या का आकलन हो सकेगा। वर्ष 2022 की पिछली गणना में दुधवा टाइगर रिजर्व में 153 बाघ दर्ज किए गए थे। इस संख्या के साथ दुधवा को देश के बाघ अभयारण्यों में चौथा स्थान मिला था। उनके अनुसार मौजूदा समय में दुधवा के जंगलों में करीब 100 तेंदुए होने का अनुमान है। इस बार गणना में शामिल होने से उनकी संख्या का सटीक आकलन हो सकेगा।
भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के विशेषज्ञ कैमरों में कैद बाघों के साथ तेंदुओं की तस्वीरों का भी डिजिटल डाटा तैयार कर रहे हैं। विस्तृत अध्ययन से दोनों प्रजातियों की संख्या और वितरण को समझने में मदद मिलेगी। प्राप्त जानकारी भविष्य की संरक्षण रणनीतियों और प्रबंधन योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगी।