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Lakhimpur Kheri News: मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने में दुधवा के हाथियों की महारत बेमिसाल

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दुधवा टाइगर रिजर्व के पालतू हाथी
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लखीमपुर खीरी। सैलानियों को जंगल की सैर करानी हो या वन संपदा की सुरक्षा के लिए जंगल की पेट्रोलिंग, दुधवा के राजकीय पालतू हाथियों का कोई जोड़ नहीं। मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने में तो दुधवा के हाथियों को बेमिसाल महारत हासिल है। बिगड़ैल बाघ और तेंदुओं को काबू करने में इन हाथियों ने हर बार अपनी काबलियत सिद्ध की है। इन दिनों दुधवा की दो मादा हाथी बिजनौर जिले में उत्पात मचा रहे तेंदुओं को काबू करने में जुटी हैं। यह हाथी अब तक तीन तेंदुओं को रेस्क्यू करा चुकी हैं।
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दुधवा टाइगर रिजर्व में मौजूदा समय में 24 राजकीय हाथी हैं। इन हाथियों को मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने का कड़ा प्रशिक्षण दिया गया है। पूरी तरह प्रशिक्षित यह हाथी दुधवा टाइगर रिजर्व और लखीमपुर खीरी जिले में ही नहीं बल्कि समूचे उत्तर प्रदेश में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन दिनों बिजनौर जिले में तेंदुओं ने उत्पात मचा रखा है। इन तेंदुओं को काबू में करने के लिए दुधवा की मादा हाथी सुलोचना और डायना को बिजनौर भेजा गया है। यह दोनों हाथी यहां से 28 जुलाई को बिजनौर भेजे गए थे। तब से अब तक यह हाथी तीन तेंदुओं को रेस्क्यू करा चुकी हैं और आज भी मुस्तैदी से काम में जुटी हुई हैं।

दुधवा के राजकीय हाथियों ने इन जगहों पर भी दिखाया अपना हुनर
जिला खीरी समेत समूचा तराई क्षेत्र मानव वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित है। दुधवा के हाथियों ने खीरी, पीलीभीत और बहराइच में मानव-वन्यजीव संघर्ष से निबटने में बड़ी भूमिका निभाई है। जंगल से भटक कर बरेली की रबर फैक्ट्री में पहुंची बाघिन को काबू में करने के लिए दुधवा से दो हाथी भेजे गए थे। इन हाथियों ने चंद दिनों में ही बाघिन को काबू में कर लिया था। इसके अलावा दुधवा के हाथी लखनऊ, कानपुर, फैजाबाद, सीतापुर, रामपुर और मुरादाबाद में भी मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने में महारत दिखा चुके हैं। घने जंगल या झाड़ियों में छिपे हिंसक वन्यजीवों का यह हाथी आसानी से पता लगा लेते हैं। बाघ और तेंदुओं को ही नहीं, हाथी जंगली हाथियों और गैंडों को भी खदेड़ चुके हैं।
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प्रशिक्षण का कमाल, दुधवा के हाथी कायम कर रहे मिसाल
सुलोचना, डायना, टरेसा, पाखरी, चमेली और सुंदर बिल्कुल युवा हैं। मानव वन्यजीव संघर्ष से निबटने के लिए यह पूरी तरह प्रशिक्षित हैं। उत्तर प्रदेश में कहीं भी जरूरत पड़ने पर इन्हीं हाथियों को भेजा जाता है। गंगाकली, रूपकली और पवन कली हथिनी वृद्धावस्था की दहलीज पर हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने में पूरी तरह माहिर होने के बावजूद इन्हें उम्र ज्यादा होने के कारण बाहर नहीं भेजा जाता। खीरी जिले के अलावा आसपास के पीलीभीत और बहराइच जिले में जरूरत पड़ने पर इनकी सेवाएं ली जाती हैं।

दुधवा के पालतू हाथियों के सेहत, खान-पान और लगातार प्रशिक्षण और अभ्यास पर विशेष तौर पर ध्यान दिया जा रहा है। दुधवा में पालतू हाथियों को दिए गए बेहतर प्रशिक्षण का ही यह परिणाम है कि उत्तर प्रदेश में कही भी मानव वन्यजीव संघर्ष होने पर दुधवा के हाथियों की सेवाएं ली जा रही हैं।
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ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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