दुधवा नेशनल पार्क में 31 साल से एक संयुक्त परिवार के रूप में रह रहे गैंडा परिवार को दो हिस्सों में बांटने की तैयारी हो रही है। 33 सदस्यीय इस परिवार के लिए 27 वर्ग किलोमीटर का घर छोटा पड़ने लगा है। परिवार में सदस्यों की संख्या बढ़ने से उनमें आए दिन संघर्ष हो रहा है। पिछले दिनों संघर्ष में एक गैंडे की मौत के बाद पार्क प्रशासन ने कुछ गैंडों को नए घर में शिफ्ट करने का फैसला किया है। इसके लिए बेलरायां रेंज के भादी वनखंड में 13 वर्ग किलोमीटर का एक सुरक्षित घर तैयार कर लिया गया है।
दुधवा नेशनल पार्क में वर्ष 1984 में असम के पोबितोरा वन्यजीव अभ्यारण्य से पांच गैंडों को लाकर गैंडा पुनर्वास योजना शुरू की गई थी। पार्क के ककरहा वन क्षेत्र में 27 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सौर उर्जा बाड़ से घेरकर बनाए गए विशेष बाड़े में रखा गया। 31 वर्षों में इनकी संख्या बढ़कर अब 33 तक पहुंच गई है।
गैंडा परिवार में बढ़ रहा संघर्ष
गैंडा परिवार बढ़ने के साथ ही उनके नर सदस्यों में प्रणय संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं। इसी साल 22 फरवरी को प्रणय संघर्ष में अर्जुन नाम का एक नर गैंडा मारा गया। वर्ष 1988 में राजू नामक नर गैंडे की भी प्रणय संघर्ष में मौत हुई थी। परिवार के सबसे बुजुर्ग लेकिन दबंग गैंडा बांके, लोहित समेत कई गैंडों पर हमला कर उन्हें घायल कर चुका है।
बेलरायां में गैंडों के लिए नया घर तैयार
दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक महावीर के मुताबिक पार्क के ही बेलरायां रेंज के भादी वनखंड में 13 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सौर ऊर्जा बाड़ से घेर कर नया घर तैयार किया गया है। 21 अगस्त को लखनऊ में वन विभाग की हुई उच्चस्तरीय बैठक में गैंडों को एक नया घर देने के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में असम के वनाधिकारियों के अलावा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारी भी मौजूद रहे। गैंडा परिवार से किन और कितने सदस्यों को नए घर में बसाया जाना है इस पर विशेषज्ञ मंथन कर रहे हैं। नए घर के लिए कुछ गैंडे असम से भी मंगाने की योजना है। फरवरी माह तक गैंडों का नया घर बसने की उम्मीद है।