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Lakhimpur Kheri News: लुप्तप्राय प्रजातियों को नई जिंदगी दे रहा दुधवा

Thu, 14 May 2026 11:10 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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दुधवा में उड़ान भरता बंगाल फ्लोरिकन पक्षी। स्रोत : वन विभाग।
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लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) लुप्तप्राय और दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहा है। तराई क्षेत्र के प्राकृतिक तंत्र में स्थित यह वन क्षेत्र जैव विविधता का बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां दुर्लभ वन्यजीवों को न केवल सुरक्षित वातावरण मिल रहा है, बल्कि उनकी संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
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दुधवा का जंगल गैंडों, बाघों, बारहसिंगा हिरणों और बंगाल फ्लोरिकन जैसे दुर्लभ वन्यजीवों का सुरक्षित आश्रय बना हुआ है। दुधवा के बफर क्षेत्र में हाल ही में विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके गिद्धों की छह अलग-अलग प्रजातियां देखी गई हैं। इनमें 259 से अधिक गिद्धों की गणना की गई है, जिसे वन विभाग बड़ी उपलब्धि मान रहा है।
एक सींग वाले गैंडों को वर्ष 1984 में असम से लाकर दुधवा में बसाया गया था। अब वे यहां सुरक्षित वातावरण में पनप रहे हैं और उनकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
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दुधवा रॉयल बंगाल बाघ का भी प्रमुख आश्रय माना जाता है। वर्तमान में यहां बाघों की संख्या 155 से अधिक पहुंच चुकी है। वहीं दलदली हिरण यानी बारहसिंगा के संरक्षण के लिए भी दुधवा विशेष पहचान रखता है। बारहसिंगा को वर्ष 1958 से यहां संरक्षित किया जा रहा है।

अन्य दुर्लभ प्रजातियों को भी सहेज रहा दुधवा
दुधवा में हिसपिड खरगोश, बंगाल फ्लोरिकन, हाथियों और कछुओं की विभिन्न प्रजातियों का भी संरक्षण किया जा रहा है। इसके अलावा यहां 450 प्रजातियों के पक्षी, हिरणों की पांच प्रजातियां, 38 से अधिक स्तनधारी प्रजातियां, 16 सरीसृप प्रजातियां और 90 से अधिक मछलियों की प्रजातियां पाई जाती हैं।
दुधवा के जंगल और घास के मैदानों में उड़ान भरने वाला बंगाल फ्लोरिकन पक्षी यहां की खास पहचान माना जाता है। इसकी संख्या 200 से अधिक बताई जा रही है।
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दुधवा टाइगर रिजर्व में लुप्तप्राय वन्यजीवों के संरक्षण की भूमिका बखूबी निभा रहा है। जिसमें पूरी सफलता मिल रही है। वन्यजीवों के संरक्षण और संवर्धन के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
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- डॉ. एच राजामोहन, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व

दुधवा में उड़ान भरता बंगाल फ्लोरिकन पक्षी। स्रोत : वन विभाग।

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