27 जनवरी को एआरटीओ ने चेकिंग अभियान चलाकर दो वाहनों में कमी पाते हुए उन्हें सीज कर दिया था। जिप्सी चालकों का आरोप है कि इससे पहले डीएम किशनपुर आई थीं और यहां उन्होंने कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया था। आरोप था कि समय से पहले वह भ्रमण पर जाना चाहती थीं लेकिन नियम विरुद्ध उन्हें नहीं ले जाया गया। इससे वह नाराज हो गईं और उनके निर्देश पर एआरटीओ ने अवैध कार्रवाई करते हुए यहां से तीन जिप्सी उठवा लीं और इसमें से दो को सीज कर दिया। इन आरोपों के साथ चालकों और गाइडों ने बृृहस्पतिवार से कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया था और अपराह्न तीन बजे की शिफ्ट में सैलानी जंगल भ्रमण पर नहीं जा सके थे । शुक्रवार को भी जिप्सी चालकों और गाइडों ने कार्य बहिष्कार जारी रखा। इसके चलते दुधवा का पर्यटन अघोषित रूप से बंद रहा। विवाद के चलते सैलानी भी वहां से चले गए।
शुक्रवार को भी किया प्रदर्शन
जिप्सी चालकों और उनके मालिकों ने शुक्रवार को भी प्रदर्शन और नारेबाजी की। उनका कहना है कि वह शोषण बर्दाश्त नहीं करेंगे। वह कर्मियों से भी आंदोलन में शामिल होने के लिए वार्ता कर रहे हैं। हालांकि अभी कर्मी इसमें शामिल नहीं हुए हैं।
30 सैलानियों को जाना था पहली शिफ्ट में
जंगल भ्रमण के लिए सुबह सात बजे पहली शिफ्ट होती है। इसमें शुक्रवार को करीब 30 सैलानियों को जंगल भ्रमण पर जाना था लेकिन जिप्सी चालकों की हड़ताल के चलते वह लौट गए।
दुधवा का मेन गेट बंद
जिप्सी चालकों की हड़ताल के चलते दुधवा पर्यटन के लिए जंगल जाने वाला मेन गेट पूरे दिन बंद रहा और सिर्फ छोटी खिड़की खुली रही। म्यूजियम भी देर से खुला और यहां भी सन्नाटा पसरा रहा। इसके अलावा कैंटीन, परिसर, रिसेप्शन पर भी सन्नाटा रहा।
प्लानिंग के तहत की कार्रवाई
जिप्सी चालकों ने कहा कि संबंधित अधिकारी को दुधवा की जिप्सी में तो कमी नजर आ गई है लेकिन उन्हें ओवरलोड और नियम विरुद्ध चल रहे वाहन नहीं दिखाई दिए। कहा, दुधवा जंगल से ही अंतर्राष्ट्रीय राजमार्ग पर रोजाना ओवरलोड और ओवरहाइट वाहन गुजर रहे हैं और कुछ रोज पहले एक ओवरहाइट वाहन ने दुधवा का बैरियर क्षतिग्रस्त कर दिया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे जाहिर होता है कि ये सब प्लानिंग के तहत किया जा रहा है।