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मां तो मां है.. शावकों को बचाने के लिए बाघ से भिड़ गई बाघिन

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लखीमपुर खीरी की किशनपुर सेंक्चुरी के बाहरी इलाके में निगरानी करतीं मादा हाथी। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। मां तो मां ही होती है। बच्चे को बचाने के लिए वह अपने प्राणों पर खेलने में रंच मात्र भी संकोच नहीं करती। किशनपुर सेंक्चुरी में बाघिन ने भी शावकों को बचाने के लिए बाघ के साथ जमकर संघर्ष करते हुए अपनी जान की बाजी लगा दी। कई घंटे तक चली लड़ाई में तीन बच्चों को बचाने में वह कामयाब रही, लेकिन एक शावक को नहीं बचा सकी।
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दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी में बुधवार सुबह चार शावकों के साथ एक जलाशय पर बाघिन पानी पीने गई थी। जहां पहले से मौजूद बाघ ने एक शावक पर हमला कर उसे बुरी तरह घायल कर दिया। यह देखते ही बाघिन ने पानी पीना छोड़ दिया और उसे तथा अन्य शावकों को बचाने के लिए बाघ से भिड़ गई। बाघ के काफी ताकतवर होने के बावजूद बाघिन ने कई घंटे तक उससे संघर्ष किया। इस संघर्ष के बीच अन्य शावक जंगल में भाग गए, जिससे उनकी जान बच गई लेकिन एक शावक को वह नहीं बचा सकी। इस इलाके में गश्त कर रही वन कर्मियों की टीम ने दूर से इस संघर्ष को देखा तो उनके होश उड़ गए। इस बीच बाघ ने मृत शावक को अपने जबड़े में दबा लिया। इस पर बाघिन ने न सिर्फ शावक के शव को छुड़ाया बल्कि बाद में उसे लेकर घास के मैदान में गुम हो गई। बावजूद इसके बाघ घटनास्थल के इर्द-गिर्द मंडराता रहा।
दुधवा के अधिकारियों के मुताबिक हमला करने वाला वही बाघ है जिसने इसी साल फरवरी माह में एक दस साल की बाघिन पर हमला कर उसे मार डाला था। इस घटना के बाद पार्क प्रशासन काफी चौकन्ना हो गया है। पार्क प्रशासन ने बाघ, बाघिन और शावकों की निगरानी के लिए वन कर्मियों की टीम गठित की है, जो चौबीस घंटे बारी-बारी से इनकी निगरानी करने के अलावा गतिविधियों और लोकेशन पर नजर रखेंगी। उस इलाके में पर्यटन की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
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घटनास्थल के आसपास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके वन कर्मी
जिस समय बाघ-बाघिन के बीच संघर्ष चल रहा था, उससे चंद कदमों की दूरी पर वन विभाग की गश्ती टीम मौजूद थी। बाघ बाघिन में हो रहे संघर्ष को देख उनके होश उड़ गए। संघर्ष इतना जबर्दस्त था कि कोई वन कर्मी वहां जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
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मौका मिलते ही नर शावकों को मार डालते हैं बाघ
उप्र राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य एवं वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ वीपी सिंह बताते हैं कि जंगल में कोई दूसरा दुश्मन न पैदा हो इसलिए मौका पाते ही बाघ, नर शावकों को निशाना बनाकर उन्हें मार डालने की कोशिश में रहते हैं। वहीं बाघों की इस आदत को जानते हुए बाघिन शावकों की जान की हिफाजत के लिए जब तक वह वयस्क नहीं होते तब तक वह उन्हें बाघों की नजरों से दूर रखती है।
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बाहरी क्षेत्र में हाथियों से हो रही निगरानी
दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में जिस इलाके में बाघ-बाघिन का संघर्ष हुआ हैं, उससे दूर बाहरी इलाके में बाघ, बाघिन और शावकों की निगरानी के लिए वन कर्मियों की टीम के अलावा दुधवा की एक्सपर्ट डायना, सुलोचना और पवनकली मादा हाथियों के जरिए संबधित क्षेत्र की सघन निगरानी कराई जा रही है। हाथियों पर सवार वन कर्मियों की टीम बाघों की गतिविधियों और लोकेेशन पर लगातार नजर रखेंगी।
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किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में बाघ ने हमला कर शावक को मार डाला है। बाघिन मृत शावक के शव को लेकर जंगल में है। बिना व्यवधान पहुंचाए बाघ, बाघिन और शावकों की सघन निगरानी कराई जा रही है। संबधित क्षेत्र की घेराबंदी कर पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। प्रभावित क्षेत्र के बाहरी इलाके में दुधवा की तीन एक्सपर्ट मादा हाथियों से निगरानी कराई जा रही है।
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- मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क
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