दुधवा में सोमवार को जंगल भ्रमण पर रवाना होते सैलानी।
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पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। दुधवा नेशनल पार्क की शुरुआत होने के बाद पहले दिन जहां खासी तादाद में सैलानियों की भीड़ रही थी। वहीं दूसरे दिन सोमवार को भी सैलानियों ने जिप्सी से जाकर जंगल के रोमांच का मजा लेने के साथ ही यहां के अलौकिक वातावरण को पास से निहारा।
सोमवार को जंगल में दुर्लभ वन्यजीवों के दीदार के लिए सैलानी पहुंचे। कोविड-19 के चलते दूसरे दिन भी पार्क प्रशासन नियमों के पालन कराने के लिए सख्त रहा और नियमों के मुताबिक ही सैलानियों का पार्क का भ्रमण कराया गया।
बता दें कि कोविड-19 के चलते इस बार गाइड लाइन के सख्त नियमों को देखते हुए एक नवंबर से दुधवा नेशनल पार्क खुलने के बाद से दुधवा नेशनल पार्क में ही सैलानियों की भीड़ का तांता लग गया था। अलौकिक वातावरण तथा स्वच्छंद विचरण करते वन्यजीवों को देखने के लिए देशी के साथ ही विदेशी सैलानियों का तांता प्रतिवर्ष लगा रहता है। इस बार भी पर्यटन सत्र खुलने के बाद दूसरे दिन सोमवार को अलग-अलग जिप्सी में जाकर सैलानियों ने पार्क का भ्रमण किया। दो शिफ्टों में सैलानियों को सुबह व शाम जंगल का भ्रमण कराया गया। दूसरे दिन तक भी कोई विदेशी सैलानी की आमद पार्क में नहीं हुई। उधर, किशनपुर में भी सैलानियों की अच्छी खासी तादाद देखने को मिल रही है। किशनपुर में अधिकतर सैलानी बाघ देखने की चाहत लेकर पहुंच रहे हैं। क्योंकि पहले दिन ही यहां एक बाघिन चार शावकों के साथ दिखी थी, जिसकी वीडियो भी उद्घाटन समारोह में दिखाई गई थी। शुरुआती दिनों में ही बाघ देखने की लालसा लेकर सैलानी यहां काफी पहुंच रहे हैं। सैलानियों की भारी आमद से दुधवा के बाहर बना पार्किंग स्टैंड भी गाड़ियों से पट सा गया है।
नेचर कंजरवेशन की तरफ से वितरित कराई गईं टार्च
पलियाकलां। नेचर कंजरवेशन एंड ईको फांउडेशन की तरफ से लगातार पार्क के सहयोगी संस्था के रूप में कार्य किया जा रहा है। फांउडेशन की तरफ से उद्घाटन के दिन पशु पक्षियों की फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। इसी क्रम में सोमवार को फांउडेशन की तरफ से फील्ड स्टाफ के रात्रि गश्त व पर्यटन सत्र होने के चलते सैलानियों के कार्य के लिए टार्च का वितरण कराया गया। दुधवा वार्डन एसके अंबरेश ने कर्मचारियों को टार्च बांटी। फाउंडेशन के सचिव लीलाधर उर्फ सोनू ने बताया कि फाउंडेशन की तरफ से लगातार ऐसे आयोजन कराए जाते हैं। इस दौरान फाउंडेशन के सचिव लीलाधर के साथ ही सहयोग आदिम दास, सोनारीपुर रेंजर गिरधारी लाल, रेंजर पर्यटन लल्लन स्वरूप दीक्षित, संध्या, शबाना, रमेश सिंह व अन्य समस्त फील्ड स्टाफ मौजूद रहा। संवाद