शासन के एक जांच आदेश पर अमल से डॉयट प्राचार्य और बीएसए के बीच रार बढ़ गई है। ऐसे में अब प्राचार्य के पति पर लगे आरोपों की जांच उलझ कर रह गई है। इन्हीं आरोपों पर शासन से आए एक पत्र पर अमल कर बीएसए ने डायट प्राचार्य को पत्र लिखकर उनका पक्ष मांग लिया। इसी पर डॉयट प्राचार्य ने गंभीरता दिखाते हुए बीएसए को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। प्राचार्य डॉ. मीरा त्रिपाठी ने बीएसए के इस कारनामे को आपराधिक करार दे दिया। साथ ही तीन दिन के भीतर उनसे जवाब तलब भी किया है।
नियमानुसार बीएसए का पद डॉयट प्राचार्य से कनिष्ठ है, जिसके तहत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अपने से वरिष्ठ डायट प्राचार्य की जांच करने का अधिकार नहीं रखते। मालूम हो कि पिछले दिनों डायट में ट्रेनिंग ले रहे प्रशिक्षुओं के डायट प्राचार्य मीरा त्रिपाठी और उनके पति पर आरोप लगाते हुए शिकायत करने का मामला सामने आया था। आरोप था कि प्राचार्य के पति उनकी शह पर सरकारी कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप करते हैं। इस पर बीएसए डॉ. ओपी राय ने शासन के पत्र का हवाला देकर उनसे जवाब तलब कर लिया। बीएसए का पत्र जब डॉयट पहुंचा तो इसको लेकर बहस छिड़ गयी कि आखिर कोई जूनियर अफसर अपने से वरिष्ठ अधिकारी को किस अधिकार से जवाब दाखिल करने के लिए अपने दफ्तर में तलब कर सकता है। अब जवाब में डायट प्राचार्य डॉ. मीरा त्रिपाठी ने खुद ही बीएसए को पत्र लिखा है, जिसमें उल्लेख किया कि बीएसए समूह ख के सबसे जूनियर अफसर हैं और वह समूह क की वरिष्ठतम अफसरों में हैं। ऐसे में कैसे बीएसए ने जांच के लिए पत्र लिख दिया। प्राचार्य ने इसे विधि विरुद्ध करार देते हुए इसे आपराधिक कृत्य ठहराते हुए बीएसए को खुद तीन दिन के भीतर अपने कार्यालय में उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने का आदेश दिया है कि उन्होंने किस हैसियत से अपने से वरिष्ठ अधिकारी की जांच शुरू की है। यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के दोनों हिस्से बीएसए कार्यालय और जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान के बीच गतिरोध बढ़ गया है। दोनों अफसरों की नजर आ रही इस रार से प्रशिक्षुओं की शिकायत पीछे छूट गई है।