प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती 2011 के संबंध में चयन समिति की बैठक न कराने का ही नतीजा है कि अभ्यर्थी रामकुमारी को पात्र होने के बाद भी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। अब डॉयट प्राचार्य सबकुछ ठीक करने के लिए बीएसए को पत्र लिख रही हैं, लेकिन कानूनी पेच के कारण मामला शिक्षा निदेशक और डीएम से लेकर उच्चाधिकारियों तक पहुंच गया है।
बीएसए डॉ. ओपी राय के अनुसार, अभ्यर्थी रामकुमारी पुत्री पालेराम ने प्रशिक्षु शिक्षक 2011 की सातवीं अनअंतिम चयन सूची में आवेदन किया था, लेकिन डॉयट प्राचार्य ने उनके बीएड अंकपत्र के जारी दिनांक में भिन्नता पाई, इसलिए अभ्यर्थी का नाम विचाराधीन/निरस्त सूची में डाल दिया।
बीएसए का कहना है कि सबसे पहली अनियमितता तो यही मिली कि या तो उसे विचाराधीन सूची में रखा जाता या फिर निरस्त किया जाता। विचाराधीन और निरस्त दोनों की एक सूची में होने का कोई औचित्य ही नहीं है, लेकिन चंद महीने बाद ही डॉयट प्राचार्य ने 21 नवंबर 15 को पत्र भेजा कि अभ्यर्थी ने अपेक्षित बीएड प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर दिया है, इसलिए रामकुमारी का नियुक्ति पत्र निर्गत कर दिया जाए।
इस पर बीएसए ने डॉयट प्राचार्य वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के लिए पत्र लिखा, जिनमें उन्होंने पूछा कि रामकुमारी का चयन, चयन समिति द्वारा निरस्त किया गया था और डीएम से अनुमोदन भी प्राप्त किया गया था। वर्तमान में क्या कारण है कि अभ्यर्थी का निरस्त नियुक्ति पत्र निर्गत करने की अपेक्षा की गई है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर बिना चयन समिति की बैठक और डीएम से अनुमोदन कराए यह अनियमित कार्रवाई क्यों की जा रही है? अब डॉयट प्राचार्य इसका जवाब नहीं दे पा रही हैं। कुल मिलाकर डॉयट की लापरवाही ही कहेंगे, जिसे अभ्यर्थी रामकुमारी को भटकना पड़ रहा है।
बीएसए डॉ. ओपी राय ने बताया कि रामकुमारी के बीएड अंकपत्र के जारी दिनांक
में भिन्नता की वजह को समझे बिना डॉयट प्राचार्य ने उसे निरस्त किया था।
उन्होंने इस गलती को सुधारने के लिए अपने स्तर पर ही नियुक्ति पत्र निर्गत
करने का आदेश तक दे डाला, जो अनियमित है।
बीएड अंकपत्र में नहीं थी भिन्नता
अभ्यर्थी रामकुमारी का कहना है कि उन्होंने बीएड की परीक्षा उन्होंने 2007 में ही उत्तीर्ण की थी, लेकिन इसकी परीणाम 2009 में घोषित किया गया था। अंकपत्र मेंपिता का नाम गलत होने के कारण 20 दिसंबर 12 को आवेदन किया था। पिता का नाम सही करके दूसरी अंकतालिका 20 दिसंबर 12 को निर्गत की गई, जिसकी जांच करने में डॉयट स्तर पर गलती की गई और अंकपत्र में जारी दिनांक की भिन्नता बता दी गई। वह कहती है कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है, लेकिन खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
और अटक गईं डॉयट प्राचार्य
डॉयट प्राचार्य डॉ. मीरा त्रिपाठी का कहना है कि काउंसिलिंग के समय जो अंकपत्र दाखिल किया गया था, उसके जारी दिनांक में भिन्नता था, इसलिए उसे विचाराधीन/निरस्त किया गया था, लेकिन डॉयट प्राचार्य इस सवाल पर अटक जाती हैं कि उन्होंने विचाराधीन और निरस्त दोनों कार्रवाई क्यों की? साथ ही वह इस बात का भी जवाब टाल जाती हैं कि जब उन्होंने रामकुमारी का निरस्त सूची में नाम डलवाने के लिए चयन समिति की बैठक कर डीएम से अनुमोदन कराया था तो अपेक्षित बीएड प्रमाणपत्र प्रस्तुत होने के बाद चयन समिति की बैठक कर डीएम से अनुमोदन क्यों नहीं कराया।