लखीमपुर खीरी। बरसात में सांपों के बिलों से निकलने के साथ जिले में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ी हैं। देखा जा रहा है कि कुछ लोग इलाज कराने के बजाय झाड़-फूंक और घरेलू उपचार में समय गंवा देते हैं, जो जानलेवा हो सकता है। सर्पदंश पर जितनी जल्दी हो सके, अस्पताल पहुंचकर इलाज कराएं।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी दिशा-निर्देश में एडीएम आईएएस नरेंद्र बहादुर सिंह ने जिलेवासियों से अपील की है कि सर्पदंश पर घबराने के बजाय मरीज को शांत रखें और अनावश्यक रूप से चलने-फिरने न दें। बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना सबसे जरूरी है।
डंक वाले हिस्से के आसपास घड़ी, अंगूठी, कड़ा या कसाव वाले कपड़े हों तो तत्काल हटा दें। प्रभावित स्थान को साबुन और पानी से साफ किया जा सकता है। घाव को काटने, चीरने या छेड़ने का प्रयास न करें। चिकित्सक की जांच के बाद जरूरत पड़ने पर अस्पताल में एंटीवेनम उपचार दिया जा सकता है।
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जहर चूसने व पट्टी बांधने से बचें
एडीएम ने कहा कि सांप का जहर मुंह से चूसकर निकालना खतरनाक है। डंक वाली जगह पर बिना चिकित्सकीय सलाह दवा, मलहम या कोई अन्य पदार्थ न लगाएं। कसकर पट्टी बांधने से भी बचें। सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें। उन्होंने बताया कि सर्पदंश की घटना पर एंबुलेंस 108, पुलिस सहायता के लिए 112 और राहत एवं आपदा हेल्पलाइन 1070 या जिला आपदा राहत कंट्रोल रूम के 05872-298410 नंबर पर सूचना दे सकते हैं।