लखीमपुर खीरी। मानसिक तनाव और अवसाद को समय रहते पहचानना आत्महत्या की रोकथाम में अहम भूमिका निभा सकता है। कई बार व्यक्ति बातचीत और व्यवहार से अपनी परेशानी के संकेत देता है, लेकिन परिवार इन्हें सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देता है।
विश्व आत्महत्या निवारण दिवस पर सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि आत्महत्या के विचारों को समय रहते रोका जा सकता है। आसपास कोई व्यक्ति लगातार उदास, निराश या गुमसुम रहता है, खुद को दूसरों पर बोझ बताता है या जीवन समाप्त करने जैसी बातें करता है तो इन संकेतों को नजरअंदाज न करें।
संकट के समय उसे डांटने, दोष देने या अकेला छोड़ने के बजाय उसकी बात ध्यान से सुनें। भावनात्मक सहयोग दें और तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करवाएं।
जिला चिकित्सालय के मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश शुक्ला ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां किसी को भी हो सकती हैं और पूरी तरह इलाज योग्य हैं। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में फैली चुप्पी तोड़ने और जरूरत पड़ने पर मदद मांगने में संकोच न करने की अपील की। परिवार, मित्र, शिक्षक, सहकर्मी और पूरा समाज मिलकर किसी डूबती जिंदगी के लिए मजबूत सहारा बन सकते हैं।
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ये संकेत दिखें तो रहें सतर्क
व्यक्ति लगातार उदास या निराश रहने लगे।
परिवार और दोस्तों से दूरी बनाने लगे।
खुद को बोझ या बेकार बताने लगे।
नींद और भूख में अचानक बदलाव आए।
भविष्य को लेकर लगातार नकारात्मक बातें करे।
मृत्यु या आत्महत्या का जिक्र करे।
क्या करें, क्या न करें
व्यक्ति की बात शांत होकर सुनें, उसे अकेला न छोड़ें और जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सक या काउंसलर की मदद लें। उसकी परेशानी का मजाक न उड़ाएं, उसे कमजोर न कहें और समस्या को यह कहकर नजरअंदाज न करें कि वह सिर्फ ध्यान आकर्षित कर रहा है।