दुधवा की गेरूआ नदी में मौजूद डॉल्फिन।
लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व से गुजरने वाली नदियों में डॉल्फिन का संरक्षण करने के लिए 801.24 लाख रुपये का प्रस्ताव वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार को भेजा गया है। इस धनराशि से डॉल्फिन की गणना करने के साथ-साथ उनके संरक्षण के लिए जरूरी उपाय किए जाएंगे। इन उपायों में जागरूकता कार्यक्रम भी शामिल हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के कतर्निया घाट वन्यजीव विहार की गेरूआ और खीरी की घाघरा नदी में बड़ी संख्या में डॉल्फिन पाई जाती हैं। पिछले वर्षों में हुई गणना में यह बात सामने आई है कि खीरी जिले और डीटीआर के कतर्निया घाट में डॉल्फिन की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जिले की नदियां डाॅल्फिन के लिए अनुकूल प्राकृतवास होने के कारण दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से आठ करोड़ 24 लाख रुपये की धनराशि संरक्षण और संवर्धन के लिए धनराशि मांगी है। इस धनराशि से डाॅल्फिन के संरक्षण के उपाय किए जाएंगे।
ग्रामीणों को किया जाएगा जागरूक
डॉल्फिन नदियों में सुरक्षित रहे इसके लिए नदियों में मछली का शिकार न करने, आसपास खेतों में कीटनाशक और खपतवार नाशक दवाओं का इस्तेमाल न करने के लिए ग्रामीणों का जागरूक किया जाएगा। कीट और खरपतवारनाशक दवाओं का इस्तेमाल होने से यह दवाएं पानी में घुलकर नदियों में पहुंच जाती हैं। जो कि डॉल्फिन के लिए घातक होती हैं। इन दवाओं के प्रभाव से नदियों में मछलियाें की कमी हो जाती है। जिससे डॉल्फिन के भोजन का भी संकट पैदा होता है।
दुधवा टाइगर रिजर्व की नदियों में डॉल्फिन के संरक्षण और संवर्धन के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार से आठ करोड़ 24 लाख रुपये की धनराशि मांगी गई है। जल्द ही स्वीकृत होने की उम्मीद है। धनराशि मिलते ही डॉल्फिन संरक्षण के प्रयास तेज किए जाएंगे।
- ललित वर्मा, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व