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लखीमपुर खीरी: गेरुआ नदी में दो चरणों में आधुनिक तकनीक से हुई डॉल्फिन की गणना

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लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में पहली बार नई ओर वैज्ञानिक तकनीक से डाल्फिन की गणना शुरू हुई है। दिसंबर और जनवरी में दो चरणों में हुई गणना साइटिंग के अलावा साउंड, लाइटिंग और कैमरा ट्रैपिंग का एक साथ इस्तेमाल हुआ है। उम्मीद है कि इससे डॉल्फिन की गणना के सटीक परिणाम मिलेंगे। वनाधिकारियों का कहना है कि अन्य जगहों पर गणना जारी है, जिससे इसके परिणाम राष्ट्रीय स्तर पर घोषित होंगे।
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दुधवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र की गेरूआ और घाघरा नदियों में बड़ी संख्या में डॉल्फिन पाई जाती हैं। इनमें घाघरा,और गेरूआ नदियों में डॉल्फिन गंगा बेसिन से भी ज्यादा हैं। वर्ष 2015 में हुई गणना में कतर्निया घाट वन्यजीव विहार में बहने वाली गेरूआ नदी में जहां 31 किलोमीटर क्षेत्र में 45 तो घाघरा नदी के 518 किलोमीटर क्षेत्र में 317 डॉल्फिन मिली थीं। नई पद्घति से हुई गणना में डाल्फिन की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
डब्ल्यूआईआई के विशेषज्ञों और नमामि गंगे के वैज्ञानिकों की टीम ने दिसंबर और जनवरी माह में दो चरणों में डाल्फिन की गणना की है। इसमें तीन नावों को निर्धारित दूरी पर आगे पीछे चलाया गया। इस दौरान डाल्फिन की सामान्य साइटिंग के साथ-साथ उनका आकुलर सर्वे किया गया। सोनार सर्वे और प्रिंगिग सिस्टम के जरिए पानी के अंदर भी डाल्फिन की तस्वीरें ली गईं। सर्वे के दौरान विशेष ध्वनि उत्पन्न की गई जिसे सुनकर डाल्फिन ऊपर आईं और उन्हें कैमरों में ट्रैप करने के साथ साथ कंप्यूटर में भी उनका डाटा फीड किया गया।
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नदी में डॉल्फिन की मौजूदगी वाले संभावित स्थलों पर लाइट और कैमरे लगाए लगाए गए। कैमरों में ट्रैप होने वाली तस्वीर और लाइट में दिखने के आधार पर डॉल्फिन की संख्या का अनुमान लगाया जाएगा।
घाघरा नदी में भी जल्दी ही होगी डाल्फिन की गणना
गेरुआ नदी के बाद अब घाघरा नदी में भी वैज्ञानिक विधि से डाल्फिन की गणना की जाएगी। घाघरा नदी में भी डाल्फिन की पर्याप्त संख्या है। घाघरा नदी में डाल्फिन गणना के दौरान भी यही वैज्ञानिक तकनीक अपनाई जाएगी। पूरे देश में डाल्फिन की गणना पूरी हो जाने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर इसके परिणाम घोषित किए जाएंगे। गेरुआ नदी में डाल्फिन की अच्छी संख्या दिखने से भारतीय वन्य जीव संस्थान के अधिकारी काफी उत्साहित हैं।
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