लखीमपुर खीरी। डिजिटल युग में भी जिला अस्पताल में 20 साल पूर्व लगी मशीन से एक्स-रे करवाए जा रहे हैं। ऐसे में सभी मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस मशीन में शरीर के अंदरूनी हिस्सों में लगीं चोट का पता भी नहीं चल पाता। ऐसे में निजी लैब की ही शरण उन्हें लेनी पड़ रही है।
चिकित्सकों का कहना है कि डिजिटल मशीन से पारंपरिक एक्स-रे की तुलना में अधिक स्पष्ट और विस्तृत छवियां मिल जाती हैं, जिससे बीमारी का सटीक निदान करने में मदद मिलती है। मरीज को भी कम विकिरण के संपर्क में आना पड़ता है। अस्पताल में रोजाना ही करीब 400 मरीजों को एक्स-रे के लिए लैब में भेजा जाता है। इसमें आधे ही एक्स-रे यहां कराते हैं। बाकी को निजी में ही जाकर जांच करानी पड़ती है। उनका समय और धन दोनों खर्च होता है।
शहर के पटेल नगर निवासी कमलेश ने बताया कि उनके हाथ में फ्रैक्चर है। जिला अस्पताल में एक्स-रे कराया। रिपोर्ट स्पष्ट न होने से चिकित्सक ने उन्हें बाहर से डिजिटल एक्स-रे कराने के लिए कहा है। अगर जिला अस्पताल में यह मशीन होती तो उन्हें बाहर से महंगी जांच नहीं करानी पड़ती।
महाराजनगर निवासी कमल तिवारी ने बताया कि हृदय संबंधी बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर ने डिजिटल एक्स-रे के लिए लिखा था, लेकिन जिला अस्पताल में ये जांच नहीं होती। बाद में बाहर से महंगी जांच करानी पड़ी।
यह तो महज बानगी है। ऐसे ही कई मरीजों को डिजिटल एक्स-रे सुविधा के अभाव में निजी जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है। प्राइवेट पैथोलॉजी में जांच शुल्क 500 से 1000 रुपये तक है। गरीब और ग्रामीण मरीजों के लिए यह खर्च भारी साबित हो रहा है।
सीएचसी में मरीजों को मिल रहा लाभ
-जिला अस्पताल में भले ही पुरानी मशीन से काम चलाया जा रहा हो, लेकिन जिले की निघासन, मितौली, बेहजम व पलिया सहित कई सीएचसी में डिजिटल एक्स-रे मशीन लगी हुई है।
दो साल से नहीं हो रही सीटी स्कैन जांच
जिला अस्पताल में सीटी स्कैन के लिए अलग से कक्ष तो बनाया गया। हालांकि, उस कक्ष में करीब दो साल बीतने के बाद भी मशीन नहीं लगाई गई। इससे मरीजों को निजी पैथोलॉजी में महंगी जांच के लिए जाना पड़ रहा है या फिर लंबी दूरी तय कर लखनऊ की दौड़ लगानी पड़ रही है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य का दावा है कि एक से दो माह के अंदर ही लखीमपुर में बन रही मेडिकल कॉलेज की नई बिल्डिंग में सीटी स्कैन की सुविधा शुरू कर दी जाएगी।
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डिजिटल एक्स-रे के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है। मशीन लगने के बाद समस्या का समाधान हो जाएगा।
डॉ. आरके कोली, सीएमएस, जिला अस्पताल