धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। कोरोना के संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए पर्याप्त संसाधन न होने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका कहना है कि पलायन कर काफी संख्या में लोग लौट रहे हैं, जिनका परीक्षण करने के लिए महकमे के जिम्मेदार पर्याप्त संसाधन तक मुहैया नहीं करवा रहे है। ऐसी स्थिति में जान जोखिम में डालकर काम कर पाना मुमकिन नहीं है। उन्होंने अपना इस्तीफा विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप पर पोस्ट किया है।
पीएचसी प्रभारी डॉ. नीलेश मौर्य बताते हैं कि रोजाना 60 से 70 लोग पलायन कर गांव लौट रहे हैं। जिनका चेकअप करना होता है। वह भी बिना संसाधन के। न तो मास्क मुहैया कराए गए हैं और न ही पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) किट। बिना संसाधन के इनकी जांच करना खतरे से खाली नहीं है। इसमें से यदि कोई पॉजिटिव हुआ तो हम लोग भी संक्रमित हो सकते हैं। एक मास्क है उसी को धोकर काम चला रहे हैं। जरूरी उपकरणों के लिए कई बार अधिकारियों को लिखा। लेकिन आज तक उपलब्ध नहीं कराए गए। पिछले कुछ दिनों से उन्हें खुद बुखार है। सतर्कता के चलते अपने को क्वारंटीन कर रखा है। इसलिए मजबूरन इस्तीफे की पेशकश करनी पड़ी। लॉकडाउन के कारण लखीमपुर तो जा नहीं सकता। सीएमओ साहब के व्हाट्सएप ग्रुप पर इस्तीफे की कॉपी डाल दी है।
स्वास्थ्य केंद्रों पर मास्क, सैनिटाइजर व दवाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। यदि कही कोई कमी पड़ रही है तो डिमांड के आधार पर उपलब्ध कराई जाती है। पीएचसी प्रभारी का आरोप गलत है। इससे पहले भी वह सीएचसी प्रभारी से अभद्र भाषा का प्रयोग कर चुके हैं। उनके इस्तीफे की जानकारी डीएम को दी गई है।
-डॉ.मनोज अग्रवाल, सीएमओ
पीएचसी प्रभारी डॉ. नीलेश मौर्य के संबंध में जानकारी मिली थी। उन्होंने सीएचसी प्रभारी से अभद्र भाषा का प्रयोग किया था, जिसकी जांच हो रही है। सीएचसी पर यदि कोई दिक्कत थी तो उन्हें बताना चाहिए था। इस तरह का व्यवहार गलत है। उन्होंने सेवानियमावली का उल्लंघन कर अशोभनीय कार्य किया है। इस संबंध में शासन को पत्र भेजा जाएगा।
- शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम