कांशीराम कॉलोनी के नींव पूजन से लेकर निर्माण मुकम्मल होने तक दिन रात पसीना बहाने वाला मजदूर का परिवार खुले आसमान तले ठिठुर रहा है। मजदूर परिवार ने रिश्वतखोरी का आरोप लगाते हुए बताया कि उसके आवेदन को गलत ढंग से खारिज कर दिया गया। पीड़ित परिवार ने डीएम कार्यालय में शिकायती पत्र देते हुए आसरे की गुहार लगाई है।
गढ़ी रोड स्थित कांशीराम कॉलोनी के निर्माण के समय से पप्पू गुप्ता और उसकी पत्नी अनीता गुप्ता मेहनत मजदूरी करने लगे। खुद के पास कोई ठिकाना तो था नहीं, लिहाजा निर्माणाधीन कॉलोनी में आई ईंटों से ही झिल्ली पल्ली तानकर वहीं रात गुजारते। सुबह फिर मेहनत मजदूरी में जुट जाते। धीरे-धीरे कॉलोनी बनकर तैयार हो गई तो ठेकेदार ने उन्हें फौरी तौर पर रहने के लिए एक कमरे में ठिकाना दे दिया, इस बीच आवंटन की प्रक्रिया शुरू हुई तो उसने भी आवेदन किया लेकिन उसे आवास नहीं मंजूर हो सका।
अवैध कब्जेदारों से खाली कराए गए आवास का नए सिरे से आवंटन हुआ तो फिर उसने आवेदन किया। आरोप है कि इस बार जांच प्रक्रिया के दौरान तहसील में कार्यरत दलालों की मांग पूरी नहीं कर सकी तो उसका आवेदन खारिज कर दिया गया। सप्ताह भर पहले तहसीलदार और पुलिस टीम ने नाजायज कब्जे खाली कराए उसमें पप्पू गुप्ता भी अपने क्वार्टर से बाहर सड़क पर आ गया। उसके पास कहीं कोई ठिकाना नहीं है। लिहाजा कॉलोनी में ही खुले आसमान तले झिल्ली और पन्नी डालकर परिवार सहित ठंड में ठिठुर रहा है। इस बाबत पीड़िता अनीता गुप्ता ने डीएम को शिकायती पत्र दिया है।
किराए पर क्वार्टर
कांशीराम कॉलोनी गढ़ी रोड़ पर ही दर्जनों आवास है जिनमें लाभार्थियों ने खुद न रहकर किराए पर आवास उठा रखे हैं। कुछ क्वाटर्स पर लाभार्थी नहीं रहते है लेकिन ताला डालकर बेवजह कब्जा बना रखा है। इन कारणों से भी लाभार्थी चयन की जांच सवालों के घेरे में है।