भले ही दुधवा नेशनल पार्क की फेडरेशन आफ फॉरेस्ट एसोसिएशन और वन रक्षक संघ ने डीएम के खिलाफ मोर्चा खोला हो। असल लड़ाई तो डीएम बनाम डीडी (डिप्टी डायरेक्टर) दुधवा की है। शनिवार को डीएम किंजल सिंह ने फेडरेशन ऑफ फॉरेस्ट एसोसिएशन द्वारा लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि जिले के गांवों में उनकी सक्रियता और पार्क अधिकारियों को अवैध कार्यों में हो रही दिक्कत तथा शासन के निर्देश पर लकड़ी कटान की कराई गई गोपनीय जांच की वजह से यह तिलमिलाहट है।
लंबे समय से चली आ रही रार को तूल पकड़ता देख शनिवार को डीएम पंचायत चुनाव में पसगवां क्षेत्र में मतदान केन्द्रों के भ्रमण को बीच में छोड़ जिला मुख्यालय आईं पत्रकारों से वार्ता करते खुलकर बोलीं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के तत्कालीन सचिव शम्भू सिंह के निर्देश पर 18 फरवरी 2015 को तत्कालीन एसडीएम पलिया ने पार्क क्षेत्र की सोठियाना रेन्ज की कैमागौढ़ी वन चौकी क्षेत्र में निरीक्षण किया तो नौ शीशम के पेड़ कटे मिले थे। मौके पर मौजूद पेड़ों की जड़ के हिस्सों के फोटोग्राफ समेत शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी। डीएम का कहना है कि जांच रिपोर्ट के बाद की कार्रवाई का उन्हें पता नहीं है, लेकिन पार्क के कर्मचारी और अधिकारी अपने मकसद में कामयाब न होने पर उन्हें मुद्दा बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि शासन उनसे पार्क क्षेत्र में गोपनीय जांच कराएगा वह पार्क प्रशासन से पूछकर नहीं जाएंगी। जिले की 62 से ज्यादा ग्राम पंचायतें पार्क क्षेत्र से जुड़ी हैं और वहां के विकास कार्यों, चुनाव कार्य तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों से जाना ही होगा। दुधवा पार्क के अधिकारी उन्हें दबाव में लेकर मनमानी नहीं कर सकते। उन्होंने अप्रैल से नवंबर तक माह वार जंगल में जाने का कारण बताया। इसके अलावा उन्होंने साथ ही उपनिदेशक दुधवा पीपी सिंह के अब तक न मिलने, पार्क उद्घाटन तक की सूचना न देने सहित प्रोटोकाल का पालन न करने की बात कहते हुए उनके व्यवहार की आलोचना की।
इसलिए जाना पड़ा पार्क क्षेत्र में
अप्रैल : नेपाल में भूकंप आने के कारण बार्डर पर लगाए गए शिविरों के लिए।
मई: थारू गांवों के भ्रमण के लिए।
जून और जुलाई: बाढ़ आपदा में राहत कार्यों के लिए।
सितंबर: नेपाल में मधेशी संगठनों की सक्रियता पर केन्द्र के निद्रेश पर बार्डर की स्थिति जानने के लिए।
अक्तूबर: थारू महोत्सव के दौरान।
‘डीएम को शोभा नहीं देता नियम कानून तोड़ना’
दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक पीपी सिंह का कहना है कि किसी भी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति को नियम कानून तोड़ना शोभा नहीं देता। ऐसा ही कृत्य डीएम खीरी पार्क क्षेत्र में रात-रात भर घूमकर कर रही हैं। चूंकि पार्क की नियमावली में रात्रि में जब तक बहुत जरूरी न हो जंगल में वाहन नहीं ले जाया जा सकता, क्योंकि जंगली जानवर रात्रि में विचरण करते हैं। ऐसा करने पर उनके संरक्षण में दिक्कत आती है। चूंकि पार्क के कर्मचारी दिन और रात्रि में ड्यूटी करते हैं, इसलिए उनसे हम 24 घंटे काम नहीं ले सकते। कर्मचारियों का विरोध जायज है, जिसकी सूचना उन्होंने उच्चाधिकारियों को भेज दी है।
प्रोटोकाल का पालन न करने के संबंधी डीएम के बयान पर उनका कहना है कि उन्होंने कई बार प्रयास किया, लेकिन डीएम ने उनसे मिलना ही पसंद नहीं किया। वह कहते हैं कि पार्क की स्थापना 1977 में हुई थी, तबसे आज तक कभी डीएम ने उद्घाटन नहीं किया। इस बार भी कमिश्नर रैंक पार्क के फील्ड डायरेक्टर/मुख्य वन संरक्षक संजय सिंह कर रहे थे। ऐसे में डीएम को बुलाने का कोई औचित्य न था।
आज से होगा कार्य बहिष्कार
पलियाकलां। फेडरेशन आफ फारेस्ट एसोसिएशन और वन रक्षक संघ ने डीएम पर कार्रवाई के अल्टीमेटम की शनिवार को मियाद खत्म होते ही रविवार से कार्य बहिष्कार का एलान कर दिया है। रविवार से दुधवा नेशनल पार्क के सभी कर्मी बहिष्कार पर रहेंगे। मालूम हो कि एसोसिएशन अध्यक्ष पतिराज सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर डीएम किंजल सिंह पर दुधवा नेशनल पार्क में नियमों को तोड़ने, रात-रात भर घूमने, कर्मियों पर दबाव बनाने, सरकारी वाहनों का दुरुपयोग करने, डीडी से अभद्रता करने आदि तमाम गंभीर आरोप लगाकर 28 नवंबर तक उन पर कठोर कार्रवाई और तबादले की मांग की थी। 28 नवंबर तक इस पत्र पर कोई भी कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए कार्य बहिष्कार का एलान कर दिया है। मांग पूरी होगी तभी कार्य बहिष्कार को वापस लिया जाएगा। सभी कर्मियों को इसके लिए सूचना दे दी गई है।
रार की असली जड़ हैं वीआईपी गेस्ट
लखीमपुर खीरी। डीएम किंजल सिंह और पार्क उप निदेशक पीपी सिंह के बीच भले ही बीते छह महीने से मतभेद चल रहा हो। 23 नवंबर को एक प्राइवेट रिसार्ट में आकर ठहरे वीआईपी के सामने डीडी दुधवा के साथ जो बातचीत हुई। वह भी रार की प्रमुख वजह है। उसी के बाद से बात यहां तक पहुंची कि न सिर्फ डीएम के खिलाफ चार पन्ने का शिकायती पत्र मुख्यमंत्री समेत सभी आला अफसरों को भेजा गया, बल्कि राष्ट्रीय पार्क के सभी कर्मचारी रविवार से काम नहीं करेंगे।
पार्क कर्मचारियों के विरोध की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मतदान कार्य में व्यस्त डीएम को 90 किलोमीटर दूर से आकर प्रेस वार्ता करनी पड़ी। इसमें उन्होंने कहा कि दुधवा नेशनल पार्क के सोनारीपुर वन विश्राम गृह में वीआईपी को रुकना था, लेकिन उन्हें एक रूम तक नहीं दिया जा सका। इस पर 23 नवंबर को जब वह रिसार्ट में आए तो वह वहां गईं थी। एसपी और एसडीएम समेत तमाम अधिकारी थे, जहां डीडी दुधवा को बुलाया गया था। वीआईपी ने उनसे अकेले में नाराजगी जताई। उसे अभद्रता नहीं कह सकते, क्योंकि उस समय-समय वहां कोई पार्क का कर्मचारी मौजूद नहीं था, लेकिन डीडी ने उन्हें (डीएम) को ही निशाना बना लिया। डीएम ने वीआईपी का नाम बताने से इंकार कर दिया। हालांकि, इस बाबत डीडी पीपी सिंह का कहना है कि 23 नवंबर को उन्हें इंस्पेक्टर पलिया ने वायरलेस से बताया कि डीएम उनसे मिलना चाहती हैं, जिस पर वह प्राइवेट रिसार्ट पहुंचे, जहां एक वीआईपी ने उनसे कमरा न देने के बारे पूछा। उन्हें जब बताया गया कि हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति वहां रुके हैं। उनके लिए तो दोनों ही वीआईपी थे। उनका कहना है कि उस समय डीएम का व्यवहार भी काफी खराब रहा, जिसे उन्होंने अपने उच्चाधिकारी को उसी दिन संज्ञान में दे दिया था। अब जो भी निर्देश मिलेंगे वह करेंगे। कुल मिलाकर इससे प्रतीत होता है कि वीआईपी के चक्कर में डीएम का न सिर्फ पार्क कर्मचारियों ने, बल्कि अधिकारियों तक ने निशाने पर ले लिया है।