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डीएम ने अजबापुर प्रबंधन को घेरा, मूक हुए मिल अधिकारी

Thu, 27 Aug 2015 11:11 PM IST
जंगबहादुरगंज
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डीएससीएल शुगर अजबापुर का प्रबंधन पर्यावरण और किसानों की चिंता किए बगैर विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़ाने जा रहा था। इसका खुलासा डीएम किंजल सिंह ने जनसुनवाई के दौरान करते हुए मिल अधिकारियों को सकते में डाल दिया। डीएम ने उनकी पत्रावली में फर्जी आंकड़े बताते हुए सवाल उठाए तो मिल अधिकारी एक दूसरे का मुंह देखते नजर आए। डीएम ने अपनी रिपोर्ट में क्षमता न बढ़ाने की संस्तुति के साथ पूर्व में मिल प्रबंधन के वायदों की स्थिति की भी जांच कराने का कहा। इसपर जहां मिल प्रबंधन फंसता हुआ नजर आया, वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी भी हलकान नजर आए।
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जनसुनवाई की शुरुआत में डीएससीएल शुगर मिल के पूर्णकालिक निदेशक डॉ.  एनजे सिंह ने मिल में 38 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता को बढ़ाकर 55 मेगावाट क्षमता करने की पूरी योजना को जनता के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि नई तकनीक से टरबाइन को बदल दिया जाएगा, जिसमें जितना ईंधन और पानी अब लगता है, उतना ही लगेगा, जिससे पर्यावरण पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन डीएम किंजल सिंह ने सवालों की झड़ी लगा दी, जिससे मिल प्रबंधन सकते में आ गया। डीएम ने दो टूक कहा कि ऐसी फर्जी आंकड़ों के आधार पर बनाई गई पत्रावली को बिल्कुल पास नहीं करेंगी। इससे जनसुनवाई के दौरान ही मिल अधिकारी पसीना-पसीना होते नजर आए।
जनसुनवाई में इन लोगों ने भी रखी राय
सहायक श्रमायुक्त एम के पांडे, जनता की ओर से क्रांति कुमार सिंह और प्रमोद कुमार सिंह ने प्रदूषण रोकने के सभी मानकों के प्रयोग पर बल दिया। इसके अलावा एचआर हेड के एन राय, गन्ना प्रबंधक ललित सैनी, अंग्रेज अत्रि, अहिबरन सिंह आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
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इनकी रही मौजूदगी
इस मौके पर एडीएम एसपी सिंह, एसडीएम मोहम्मदी नागेंद्र कुमार सिंह,  पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड लखनऊ के क्षेत्रीय अधिकारी कुलदीप मिश्रा, अभियंता चंद्र मोहन श्रीवास्तव, अपर महाप्रबंधक कुलदीप सिंह समेत तमाम क्षेत्रीय किसान मौजूद रहे।
तो जिले में जनहित की परवाह किए बिना हो रहा है बिजली उत्पादन
लखीमपुर खीरी। जनसुनवाई में डीएम किंजल सिंह ने डीएससीएल शुगर अजबापुर द्वारा किए जा रहे बिजली उत्पादन में हवा, पानी और मिट्टी को नुकसान पहुंचाने की बात कही। इससे साफतौर पर यह बात सामने आई है कि यहां अब तक हो रहे 38 मेगावाट बिजली उत्पादन से आम जनता और किसानों की सेहत और फसल को भारी नुकसान हो रहा था। अब देखना यह है कि 17 मेगावाट बिजली उत्पादन बढ़ाने की फाइल के मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्या कदम उठाता है।
डीएम ने चीनी मिल द्वारा बिजली उत्पादन की पत्रावली में कोई भी फारेस्ट का रिजर्व एरिया न होने की बात कही गई है, जबकि जिले में संरक्षित वन क्षेत्र है। इसमें डीएफओ का प्रमाणपत्र भी नहीं लगाया गया। इसके बाद उन्होंने दो टूक कहा कि पहले से हो रहे 38 मेगावाट बिजली उत्पादन के मामले में हवा, पानी और भूमि का टेस्ट कराकर भारत सरकार की प्रमाणित एजेंसी की रिपोर्ट भी नहीं लगाई गई है, जिससे साफ है कि इन तीनों ही जनहित और किसान हित कारी मूलभूत चीजों की परवाह नहीं की गई। उन्होंने साफ कहा कि यह इलाका पसगवां ब्लाक में आता है, जिले में यही ब्लाक ऐसा है जो जलस्तर की कमी के मामले में डार्क जोन में आता है। इसके बाद भी यहां बिजली उत्पादन में अब तक हर दिन 13 हजार किलोलीटर पानी प्रयोग किया जा रहा है। रिपोर्ट में इस यूज होने वाले पानी के जल संरक्षण के तहत संरक्षित किए जाने की बाबत भी उल्लेख नहीं है। डीएम ने यह भी सवाल उठाया कि तीन साल से बिजली उत्पादन हो रहा है। इस दौरान प्रदूषण की स्थिति, जलस्तर और मिट्टी जांच की कोई रिपोर्ट न देना भी मिल प्रबंधन द्वारा की जा रही किसानों और जनता की परवाह को दर्शाता है। मिल में चीनी बनाने में भारी मात्रा में सल्फर का प्रयोग करती है, लेकिन 17 मेगावाट बिजली उत्पादन की मंजूरी पाने के लिए इसके प्रयोग न करने की रिपोर्ट दी है, जो सरासर झूठ है। डीएम ने यह भी सवाल उठाया कि क्षमता बढ़ाने के बाद पॉवर ग्रिड तक बिजली पहुंचाने के लिए किन किसानों के खेत से तार जाएंगे और उन्हें मिल प्रबंधन क्या सुविधा देगा इसका भी कोई जिक्र नहीं किया गया है। मिल ने बिजली उत्पादन से होने वाले प्रदूषण के एवज में 10 गांव गोद लिए थे, लेकिन वहां क्या किया? इसको भी रिपोर्ट में नहीं दिया। डीएम ने यह भी कहा कि चीनी मिल से बैगास और रॉ मैटेरियल बनते हैं, जिसके उत्पादन से कार्बन निकलता है, लेकिन शर्त के बाद भी मिल प्रबंधन ने एनवायरमेंटल मॉनीटरी प्रोग्राम नहीं चलाया, न ही कोई फॉलोअप किया। डीएम ने अंत में दो टूक कहा कि ऐसे में 17 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की परमीशन कतई न दी जाए। साथ ही डीएम ने हो रहे 38 मेगावाट उत्पादन के लिए भी मिल प्रबंधन औपचारिकता पूरी कर रहा है अथवा नहीं, उसकी भी जांच रिपोर्ट तलब की है। इससे जहां मिल प्रबंधन सकते में है, वहीं यह बात भी साफ हो गई है कि अब तक जनहित की परवाह किए बगैर यहां बिजली उत्पादन किया जा रहा है।
पूर्णकालिका निदेशक, डीएससीएल शुगर डॉ. एनजे सिंह ने बताया कि पर्यावरण के क्षेत्र में डीएससीएल शुगर लगातार काम कर रहा है, लेकिन डीएम ने पत्रावली में जो सवाल उठाए हैं। किसानों और जनता के हित में पर्यावरण के क्षेत्र में और कार्य किए जाएंगे तथा सभी आवश्यक जांच कराकर पत्रावली को दुरुस्त किया जाएगा।
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