गुरुद्वारे में मत्था टेका, सुनी खालसा साजना की कथा
गुरुद्वारों में चले अटूट लंगर, सैकड़ों लोगों ने छका प्रसाद
बैसाखी का पर्व जिले भर में खालसा साजना दिवस के रूप में श्रद्धा के साथ मनाया गया। शहर के विभिन्न गुरुद्वारों में दीवान सजाए गए। रागी जत्थों ने शबद कीर्तन पेश कर संगत को निहाल किया।
पंजाबी कालोनी स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब में आयोजित कार्यक्रम में बरेली से आए प्रचारक भाई बरेंदर पाल सिंह ने कि वर्ष 1699 में श्रीगुरु गोविंद सिंह ने आनंदपुर साहिब की धरती पर पंचप्यारों को अमृत छका कर खालसा पंथ की स्थापना की थी। इस मौके पर 35 लोगों ने अमृत छक कर गुरू के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेकर खालसा पंथ में दाखिला लिया।
प्रचारक बरेंदर पाल सिंह और हुजूरी भाई दिलबाग सिंह ने शबद कीर्तन से संगत को निहाल किया। इस मौके पर सदर विधायक योगेश वर्मा ने गुरुद्वारा आकर मत्था टेका। सिख समाज ने उन्हें सम्मानित किया। गोष्ठी की समाप्ति के बाद गुरुद्वारे में अटूट लंगर चला जिसमें काफी संख्या में लोगों ने लंगर छका। इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव, रंजीत सिंह छाबड़ा, त्रिलोचन सिंह जुनेजा, देवेंद्र पाल सिंह राना आदि मौजूद रहे।
उधर गुरुद्वारा श्रीगुरु सिंह साहब में बैसाखी के मौके पर दीवान सजाया गया। रागी जत्था भाई अनूप सिंह और करनैल सिंह ने शबद कीर्तन पेश कर संगत को निहाल किया। अमृतसर से आए महिपाल सिंह भिंडर ने खालसा साजना की कथा सुनाई। इंद्रपाल सिंह राना ने बताया कि हिंदू धर्म और देश की रक्षा के लिए गुरु गोविंद सिंह ने वर्ष 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की थी। गेहूं की फसल की कटाई बैसाखी से शुरू होने की परंपरा है।
इस मौके पर कुलवंत सिंह खैरा, मनमोहन सिंह भंडारी, पाल सिंह, जरनैल सिंह, हरजिंदर सिंह, गुरदेव सिंह, कमल चावला आदि लोग मौजूद रहे।