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परिंदाें से प्यार ही है चमेली देवी की जिंदगी

Thu, 15 Jan 2015 12:27 AM IST
बांकेगंज
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जीवन के 80 बसंत देख चुकीं ग्राम नीमगांव की चमेली देवी के पक्षी प्रेम की चर्चा समूचे क्षेत्र में है। अपनी पूरी जिंदगी उन्होंने परिंदों की सेवा में गुजार दी। उनके जीवन में शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरा हो जब कुछ समय उन्होंने परिंदों के साथ न गुजारा हो। पक्षी प्रेम के साथ-साथ वह अपने घर और परिवार की जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभा रहीं हैं।
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चमेली देवी को बचपन से ही परिंदों से बेहद लगाव था। समय के साथ उनका पक्षी प्रेम बढ़ता गया। तमाम व्यस्तताओं के बावजूद उनका पक्षी प्रेम कम नहीं हुआ है बल्कि समय के साथ बढ़ता गया। घर में चाहे शादी-ब्याह हो, कोई अन्य मांगलिक कार्यक्रम अथवा दूसरी कोई व्यस्तता वह परिंदों को दाना डालना कभी नहीं भूलतीं।
चमेली देवी से पक्षी इतना घुल-मिल गए हैं कि हर दिन सैकड़ों की संख्या में उनकी गोद, कंधे, सिर और यहां तक कि पीठ पर आकर बैठ जाते है। जिन्हें वह अपने बच्चों की तरह दुलारती, पुचकारती और दाना डालती हैं। लगता है जैसे पक्षी उनकी भाषा समझते हैं और वह पक्षियों की भाषा जानती हों।
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परिंदे चमेली देवी के पास पूरे साल प्रतिदिन सुबह 9 और शाम करीब 3 बजे दाना चुगने आते हैं। उन्होंने बताया कि परिंदों की चहचहाहट उन्हें कुछ ऐसी लगती है कि जैसे उनका और परिंदों का जन्म-जन्म का रिश्ता हो। उन्होंने बताया कि परिंदे अपने समय पर आकर दाना चुगने और कुछ देर उनके साथ अठखेलियां करने के बाद आराम से चले जाते हैं।  चमेली देवी ने कभी किसी पक्षी को पालने के लिए पिंजरे में बंद नहीं किया। वह कहती हैं कि पक्षी उनके प्यार में बंधे हैं। पक्षी कुदरत की सबसे खूबसूरत देन हैं। वह पिंजरे में नहीं आसमान में उड़ते हुए ही अच्छे लगते हैं।
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