ओयल। मेडिकल कॉलेज के अधीन जिला अस्पताल में अब भी मैनुअल एक्स-रे मशीन से मरीजों की जांच की जा रही है। इस मशीन में कई तरह की आंतरिक चोट और बारीक समस्याएं स्पष्ट नहीं दिख पातीं, जिससे मरीजों को मजबूरन बाहर प्राइवेट लैब से डिजिटल एक्स-रे कराना पड़ रहा है। इसके कारण मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन 800 से 1200 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इनमें से 70 से 80 मरीज अस्थि रोग विभाग के होते हैं, जिनमें अधिकांश को एक्स-रे जांच की आवश्यकता पड़ती है। डॉक्टरों के अनुसार, करीब 10 प्रतिशत मामलों में मैनुअल एक्स-रे से बीमारी स्पष्ट नहीं हो पाती। ऐसे मरीजों को 500 से 800 रुपये खर्च कर प्राइवेट लैब का सहारा लेना पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल एक्स-रे से हड्डियों, फेफड़ों, रीढ़, कूल्हे, आंतरिक चोटों, टीबी सहित कई गंभीर बीमारियों की पहचान जल्दी हो जाती है, जिससे समय पर इलाज संभव हो पाता है। मेडिको-लीगल मामलों में भी मैनुअल एक्स-रे से सटीक रिपोर्ट न मिलने पर दिक्कतें आती हैं।
-सीएचसी में सुविधा, जिला अस्पताल पीछे-
जिले की निघासन, मितौली, बेहजम, फरधान और पलिया सहित कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डिजिटल एक्स-रे मशीनें उपलब्ध हैं, लेकिन जिला मुख्यालय के अस्पताल में यह सुविधा न होना स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
रीढ़ की हड्डी और कूल्हे से जुड़े मरीजों में बारीक समस्याएं होती हैं, जो मैनुअल एक्स-रे में साफ नहीं दिखतीं। ऐसे मामलों में डिजिटल एक्स-रे जरूरी हो जाता है।
-डॉ. एके द्विवेदी, अस्थि रोग विशेषज्ञ
-
जिला अस्पताल में फिलहाल दो मैनुअल एक्स-रे मशीनें हैं, जिनकी क्षमता 100-100 एमए है। इनमें से एक मशीन वर्ष 2024 और दूसरी 2025 में स्थापित की गई है। रेडियोलॉजिस्ट का कहना है कि मैनुअल मशीन से भी कई जांच संभव हैं, लेकिन डिजिटल एक्स-रे तकनीक अधिक उन्नत और सटीक मानी जाती है। मैनुअल एक्स-रे की फिल्म डार्क रूम में तैयार की जाती है, जबकि डिजिटल एक्स-रे कंप्यूटर आधारित होता है।
-डॉ. डीके पुष्कर, रेडियोलॉजिस्ट, जिला अस्पताल
डिजिटल एक्स-रे मशीन के लिए शासन को भेजा गया प्रस्ताव पास हो गया है। मेडिकल कॉलेज की नई बिल्डिंग में दो सप्ताह में डिजिटल मशीन लग जाएगी।
-डॉ. आरके कोली, सीएमएस, जिला अस्पताल